रावी दरिया के पानी की सीधी टैपिंग यानि की नहर जुड़ने से जम्मू कश्मीर सरकार को सालाना 14 करोड़ की बचत होने जा रही है। दरअसल रावी दरिया से वर्तमान में पिछले तीन दशक से भी अधिक समय से पानी को नहरों तक पहुंचाने के लिए लिफ्ट सिंचाई योजनाएं चलाई जा रही हैं। सालाना इसपर 14 करोड़ रूपए का खर्चा आता रहा है।
शाहपुर कंडी और बसंतपुर में रावी नहर के जुड़ जाने से दस करोड़ का यह खर्चा नहीं होगा। न तो इन लिफ्ट सिंचाई योजनाओं की मरम्मत की जरूरत होगी और न ही अतिरिक्त कर्मचारियों की जरूरत होगी। जिले में 575 किलोमीटर लंबे नहरों और कूहलों के नेटवर्क में सीधा पानी पहुंचेगा। जिससे 32173 हेक्टेयर जमीन सिंचित होगी। इसके अलावा शाहपुर कंडी परियोजना से जम्मू कश्मीर को बिजली उत्पादन का बीस प्रतिशत भी बस बार रेट पर उपलब्ध होगा। शाहपुर कंडी परियोजना में 206 मेगावॉट बिजली का उत्पादन प्रस्तावित है।
तीन मार्च 2017 को छंटा परियोजना पर छाया संकट
20 जनवरी, 1979 को शाहपुर कंडी बांध परियोजना को लेकर जम्मू-कश्मीर और पंजाब के बीच समझौता हुआ था। पिछले चार दशक से परियोजना को लेकर दोनों राज्यों में आम सहमति नहीं बन पा रही थी। यही वजह रही कि राष्ट्रीय परियोजना घोषित हुई शाहपुर कंडी के पंजाब द्वारा शुरू करवाए गए काम को जम्मू कश्मीर ने वर्ष 2014 में यह कहकर बंद करवा दिया कि काम जम्मू कश्मीर के अधिकार क्षेत्र में चल रहा है।
जम्मू कश्मीर सरकार जहां रंजीत सागर बांध के समय पर हुए समझौते में बिजली और पानी के नुकसान का मुआवजा चाहती थी वहीं शाहपुर कंडी परियोजना में भी कुछ मतभेद उभरकर सामने आए। तीन मार्च 2017 को पीएमओ के हस्तक्षेप के बाद पंजाब और जम्मू कश्मीर राज्यों के सिंचाई सचिवों की द्विपक्षिय बैठक हुई जिससे परियोजना को लेकर चल रहे दोनों राज्यों के मतभेद काफी हद तक कम हो गए। आखिरकार राज्य कैबिनेट ने मुहर लगाकर शाहपुर कंडी परियोजना का कार्य फिर शुरू किए जाने को भी हरि झंडी दिखा दी गई।