जम्मू। हज यात्रा के कोटे में कटौती की हलचल के बीच जम्मू-कश्मीर के तीर्थ यात्रियों और टूर ऑपरेटर में बेचैनी बढ़ गई है। जम्मू-कश्मीर में इसका विरोध शुरू हो गया है। राजनीतिक दलों ने केंद्र सरकार से इस मामले को लेकर सऊदी सरकार से बात करने की मांग की है।
इस साल हज यात्रा के लिए एक लाख 75 हजार 25 यात्रियों के जाने पर भारत सरकार और सऊदी अरब के बीच जनवरी में समझौता हुआ था। पहले हज यात्रा का कोटा 80-20 की दर से निर्धारित था। इसमें 80 प्रतिशत सरकारी और 20 प्रतिशत निजी यात्री शामिल थे। अब इस कोटे में कटौती की चर्चा है। नेताओं ने संभावना जताई है कि 40 हजार यात्री नए नियम की वजह से यात्रा से वंचित हो सकते हैं। इसका असर उन ऑपरेटर पर देखने को मिलेगा, जो इस यात्रा को लेकर अपनी सभी तैयारियां पूरी कर चुके हैं। हज यात्रा के लिए पंजीकरण करवाने वाले यात्री पहले ही भुगतान कर चुके हैं। जम्मू-कश्मीर के नेताओं ने केंद्र सरकार से सऊदी अरब के समक्ष इस मुद्दे के समाधान की बात रखी है। जम्मू-कश्मीर से हज करने वाले यात्रियों की तादाद हजारों में रहती है।
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राज्य से 2024 में गए थे 7000 यात्री
बीते वर्ष भी यहां से करीब सात हजार से ज्यादा यात्रियों ने हज में हिस्सा लिया था। देश भर से 2024 के हज के लिए कुल एक लाख 75 हजार यात्री पंजीकृत हुए थे और इनमें एक लाख 40 हजार से ज्यादा यात्रियों को समिति के माध्यम और करीब 35 हजार यात्रियों को हज ग्रुप ऑपरेटर के माध्यम से यात्रा की अनुमति मिली थी। इस साल के समझौते में इस संख्या में बढ़ाेतरी नहीं की गई थी, लेकिन अब कटौती के फैसले ने राजनीतिक दलों और संगठनों की चिंता बढ़ा दी है।
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हज यात्रा क्या है?
इस्लाम के मुताबिक, हज अल्लाह से जुड़ने, माफी मांगने और विश्वास मजबूत करने का माध्यम है। दुनिया भर के इस्लाम अनुयायी हज यात्रा के लिए सऊदी अरब में स्थित मक्का-मदीना जाते हैं। इस्लाम धर्म के पांच मूल सिद्धांत बताए गए हैं। जिनमें शाहदा (विश्वास), सलाह (प्रार्थना), जकात (दान), रोजा (उपवास) और हज शामिल है।
कूटनीतिक स्तर पर निपटाएं मामला -फारूक
नेशनल कान्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सऊदी अरब पर दबाव बनाने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि सऊदी अरब सरकार ऐसे अवसर पर वीजा देने से इंकार कर रहा है जब हज यात्रा शुरू होने वाली है। फारूक ने कूटनीतिक स्तर पर इस मामले के समाधान की भी बात कही है।
सऊदी अरब के फैसले से प्रभावित होंगे सैकड़ाें लोग
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भारतीय हज यात्रियों को इस मुश्किल से निकालने का रास्ता खोजने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को भारतीय तीर्थ यात्रियों और हज से जुड़े सैकड़ों कामगारों की मदद के लिए कदम उठाने होंगे। सऊदी अरब के इस फैसले का सीधा असर इन सभी पर पड़ने वाला है। हज यात्रा से ठीक पहले सऊदी अरब ने अलग-अलग श्रेणियों में वीजा रद्द किए हैं। इनमें बिजनेस, पर्यटन और परिवार के वीजा शामिल हैं। इनमें भारत के अलावा दूसरे देशों के वीजा भी रद्द हुए हैं। भारत में रद्द हुए वीजा और यात्रा में कटौती को लेकर मुस्लिम नेता और धार्मिक संगठन अब चिंता में हैं।
सऊदी अरब सरकार से बात करे केंद्र -महबूबा
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि सऊदी अरब से परेशान करने वाली खबर आ रही है। रिपोर्ट्स से पता चलता है कि भारत के निजी हज कोटे में से 80 प्रतिशत में अचानक कटौती कर दी गई है। इस अचानक फैसले से देश भर के तीर्थ यात्रियों और टूर ऑपरेटरों को भारी परेशानी हो रही है। उन्होंने विदेश मंत्रालय से आग्रह किया है कि वह इस मामले को सऊदी सरकार के समक्ष उठाकर तत्काल हस्तक्षेप करें, ताकि समाधान निकाला जा सके।
40 हजार यात्री होंगे वंचित - बुखारी
अपनी पार्टी के नेता अल्ताफ बुखारी ने कहा कि भारतीय हज यात्रियों के लिए निजी हज कोटा में कटौती गहरी चिंता का विषय है। इससे लगभग 40 हजार से अधिक योग्य यात्री इस वर्ष पवित्र तीर्थयात्रा करने के अवसर से वंचित हो जाएंगे। इनमें से अधिकांश हज यात्री लंबे समय से पहले ही भुगतान कर चुके हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट को विदेश मंत्री डाॅ. एस जयशंकर और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू को टैग किया है। उन्होंने कहा कि वे इस निर्णय को वापस लेने के लिए सऊदी अधिकारियों के समक्ष मामले को उठाएं।