जम्मू। कांग्रेस छोड़ने वाले नेता गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि हमने कांग्रेस को खून-पसीने से सींचा है। हमारे खून-पसीने से बनी कांग्रेस अब ट्विटर व कंप्यूटर तक सिमट कर रह गई है। हालात यह हैं कि आज कांग्रेसी बसों में जेल जाते हैं। डीजीपी या कमिश्नर को बुलवाकर नाम लिखवाते हैं और एक घंटे के बाद छूट जाते हैं। इस वजह से कांग्रेस आगे नहीं बढ़ रही है।
कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद पहली बार जम्मू में अपने समर्थकों के बीच सार्वजनिक मंच से 55 मिनट के भाषण में उन्होंने नई पार्टी के एजेंडे का खुलासा करने से लेकर कांग्रेस पर कई बार निशाना भी साधा। कहा कि पार्टी ने उन्हें मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री बनाया, लेकिन ट्रवीट, एसएमएस और कंप्यूटर वाले नेता अब कांग्रेस चला रहे हैं। मैं हमेशा जमीन से जुड़ा रहा, लेकिन नई पार्टी के एलान से लोगों में बौखलाहट है। आजाद ने कहा कि कांग्रेस हमने बनाई है। अपने खून-पसीने से बनाई है। हमारे खिलाफ गलत अफ वाहें फैलाने से नहीं बनी है। हमारे गरीब, किसान, नौजवान, बहू-बेटियां हमारी नस-नस में हैं। जो हमें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं उनकी पहुंच केवल ट्वीट, एसएमएस और कंप्यूटर तक है। वो डिबेट में खुश रहें, उन्हें वही नसीब हो। हम बुजुर्गों व किसानों के साथ ठीक हैं। उन्हें उनकी शहंशाही मुबारक। तंज कसते हुए कहा कि अल्लाह हमें जमीन नसीब करें और उन्हें ट्वीट नसीब करें।
गुलाम नबी आजाद ने इंदिरा गांधी की गिरफ्तारी से जुड़ा किस्सा सुनाया। आज जब कांग्रेस के लोग जेल जाते हैं। सुबह बस में ले जाते हैं, उसी वक्त डीजी पुलिस व कमिश्नर को फ ोन करते हैं कि नाम लिख लीजिए और फि र छोड़ दीजिए। इसलिए कांग्रेस आगे नहीं बढ़ सकी। जब इंदिरा गांधी को संसद से बर्खास्त किया और सीधे तिहाड़ जेल ले गए। मैंने महासचिव के नाते 5000 यूथ कांग्रेस का जुलूस निकाला जो दिल्ली के जामा मस्जिद से शुरू होकर संसद के रास्ते बढ़े तो हम सबको गिरफ्तार किया।
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संघर्ष की कहानी से कसा तंज
अपने संघर्ष को याद करते हुए आजाद ने कांग्रेसियों पर तंज भी कसा। कहा कि 1988 में गिरफ्तारी के बाद इंदिरा जी को एक हफ्ते में छोड़ा गया। लेकिन हमें काफी दिनों तक जेल में रखा। क्योंकि वो जमानत चाहते थे हमने जमानत नहीं दी। सीमेंट का फ र्श था, सीमेंट पर सोना था। जनवरी के महीने में एक कंबल बिछाने और आधा ओढ़ने के लिए। खाने के लिए दो रोटी और एक दाल। यह था पूरा संघर्ष। आज तो कांग्रेसी एक घंटे में ही रिहा हो जाते हैं।