जम्मू। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि सेवाओं के कुशल वितरण के लिए प्रशासन और स्वैच्छिक नागरिकों के समूह के बीच इंटरफेस को मजबूत करने की जरूरत है। पर्यावरण, महिला सशक्तीकरण, आदिवासी कल्याण, वृद्धों और विशेष रूप से दिव्यांगों की देखभाल जैसे सामाजिक क्षेत्र की प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है।
नई दिल्ली में सामाजिक परिवर्तन में योगदान करने वालों को सम्मानित करने के लिए चेतना पुरस्कार वितरण समारोह में उन्होंने कहा कि नि:स्वार्थ सेवा हमारे भविष्य की कुंजी है। राष्ट्र निर्माण के लिए यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों विशेष रूप से सबसे गरीब से गरीब लोगों के बीच समान रूप से वितरित किए जाएं। स्वैच्छिक संगठनों और प्रशासनिक तंत्र के साथ मिलकर काम करने वाले व्यक्तियों में लोगों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाने, व्यवस्थाओं में अंतर को पाटने व समाज और राष्ट्र की प्रगति में योगदान देने की क्षमता है। इस अवसर पर उपराज्यपाल ने समाज को अपनी निरंतर निस्वार्थ सेवाएं प्रदान करने के लिए लगभग 32 परिवर्तनकर्ताओं को पुरस्कार प्रदान किए। कहा कि रचनात्मक समाज कार्य के प्रति समर्पित ये सभी स्त्री-पुरुष राष्ट्रीय विकास के असली नायक हैं। वे हमारे सामाजिक क्षेत्र की रीढ़ हैं। वास्तव में दूसरों को विशेष रूप से युवा पीढ़ी को समाज की निस्वार्थ सेवा में भाग लेने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। चेतना हीरोज-स्प्रेडिंग गुडनेस नामक कॉफ ी टेबल बुक का भी विमोचन किया। सांसद केज अल्फ ोंस व श्रीमती लॉकेट चटर्जी, उषा राय, रवि शर्मा, प्रेमा ज्योति, प्रभात कुमार उपस्थित थे।
नाजिया ने किया प्रेरित
जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा निवासी नाजिया हुर्रा का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि वह विशेष रूप से विकलांग बच्चों और गरीबों से संबंधित लोगों की भलाई और समाज के सीमांत वर्ग के लिए काम कर रही हैं। अपने निजी जीवन में कई चुनौतियों के बावजूद नाजिया बांदीपोरा और गांदरबल में कम विशेषाधिकार प्राप्त लोगों के लिए अनुकूल माहौल बनाने और दूसरों को सेवा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करने में सफ ल रही है।