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परिसीमन आयोग की सिफारिश के बाद पीओजेके की सीटें खोलने की भरी हुंकार

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जम्मू। परिसीमन आयोग की दो दिन पहले विस्थापितों के लिए कुछ सीटों का प्रावधान करने की सिफारिश के बाद पीओजेके के लिए जम्मू-कश्मीर विधानसभा में आरक्षित सीटों को खोलने की आवाज उठने लगी है। संघ परिवार की ओर से रविवार को आयोजित पुण्य भूमि स्मरण सभा में देशभर से जुटे विस्थापितों ने आरक्षित 24 में से आठ सीटें खोलने की हुंकार भरी।
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पीओजेके को आजाद कराने के गगनभेदी नारों के बीच सभा में कहा गया कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 24 सीटों का प्रावधान किया गया है। ये सभी सीटें खाली पड़ी हैं। वहां के विस्थापित जो पूरे देशभर में फैले हुए हैं, उन्होंने भारी दुख सहा है। अब भी उनकी आंखें बीते दिनों को याद कर छलक पड़ती हैं। कई लोगों का पूरा परिवार खत्म हो गया था। अब भी उन्हें उनके बचपन के दिन और मंदिरों के घंटे घड़ियाल की आवाज सुनाई देती हैं। विस्थापितों को राजनीतिक रूप से सशक्त करने के लिए जरूरी है कि वहां की आठ सीटें खोल दी जाएं ताकि उन पर नुमाइंदगी हो सके। इससे विस्थापितों का दुख-दर्द सुनने वाला कोई सामने होगा। सभा में संसद में 22 फरवरी 1994 को पास उस प्रस्ताव की भी चर्चा की गई, जिसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले भाग को अपना बताते हुए संकल्प पारित किया गया था कि पाकिस्तान को उस भूभाग को छोड़ना ही होगा। सभा में विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन, महामंडलेश्वर स्वामी धर्मदेव समेत तमाम वक्ताओं ने कहा कि अब वह दिन दूर नहीं जब हम अपनी मातृभूमि का स्पर्श कर पाएंगे। अनुच्छेद 370 हटा और तमाम बदलाव आए। अब पीओजेके की बारी है।
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तिरंगों के साथ पूरा माहौल देशभक्ति में डूबा
जम्मू के गांधीनगर महिला कॉलेज में आयोजित समारोह स्थल तिरंगे झंडों से पटा पड़ा था। भारत माता की जय और वंदे मातरम के गगनभेदी नारे गूंज रहे थे। देशभक्ति गीत भी बज रहे थे। समारोह स्थल पूरा तिरंगे रंग में रंगा हुआ था। सड़कों के किनारे भी तिरंगे ही तिरंगे नजर आ रहे थे। समारोह स्थल में तिरंगों के साथ नारे लगाता हुआ जितना हुजूम प्रवेश कर रहा था, उतना ही हुजूम सभास्थल से बाहर भी बाहर निकल रहा था।
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आई लव पीओजेके
आई लव पीओजेके वाले सेल्फी प्वाइंट पर सेल्फी लेने के लिए पीओजेके विस्थापितों की भारी भीड़ जुटी रही। एक ग्रुप सेल्फी लेकर वहां से हटता तो दूसरा ग्रुप पहुंच जाता। पूरे समय तक लोग अपनी बारी की प्रतीक्षा करते रहे। सेल्फी लेने के दौरान भारत माता की जय, वंदे मातरम के साथ ही आई लव पीओजेके के नारे लगते रहे। दिल्ली से आए विश्व कुमार और हिमाचल के ऊना की रजनी ने बताया कि उन्होंने वह सब मंजर तो नहीं देखा है लेकिन मातृभूमि के पास जाने की इच्छा है। आज संकल्प लिया गया है कि वे पीओजेके को वापस लाने के लिए संघर्ष करेंगे।
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मंदिरों व नरसंहार से नई पीढ़ी को कराया अवगत
समारोह स्थल पर पीओजेके के मंदिरों, पाकिस्तान की बर्बरता, कायरता और नरसंहार की जानकारी देने के लिए पूरा विवरण फ्लैक्स के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। समारोह स्थल पर कब क्या हुआ और कैसे पाकिस्तान ने बर्बरता की, इसकी पूरी जानकारी थी। कबायली हमले में मारे गए लोगों के नाम भी प्रदर्शित किए गए। कार्यक्रम आयोजित करने वाली संस्था जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फोरम के सदस्य अशोक गुप्ता ने बताया कि इसका मकसद नई पीढ़ी को सच से रूबरू कराना भी था। यह बताना उद्देश्य था कि पूर्वजों ने किस प्रकार की बर्बरता सही है। कैसे उन्हें विस्थापित होना पड़ा। उम्मीद है कि इससे विस्थापित समुदाय में जागरूकता बढ़ेगी।
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