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किसानों और बेरोजगार युवाओं को उद्योगों से जोड़ेगा आईआईआईएम

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जम्मू। आईआईआईएम जम्मू प्रदेश के बेरोजगार युवाओं और किसानों को सुगंधित फसलों के उद्योगों के साथ जोड़ेगा। सीएसआईआर आईआईआईएम दो महीने के भीतर भारत के उद्योगपतियों को संस्थान में बुलाकर किसानों से रूबरू करवाएगा। उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा। लेमनग्रास, क्लेरी सेज, रोज मेरी, जंगली गेंदा और लैवेंडर की फसलों को तकनीकी तरीके से उगाने और उनका तेल निकालने के बारे में जागरूक किया जाएगा। किसानों को उत्पाद की बिक्री के लिए स्थानीय बाजार भी उपलब्ध करवाया जाएगा।
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अरोमा मिशन के नोडल अधिकारी और वरिष्ठ वैज्ञानिक सुमित गैरोला ने कहा कि प्रदेश में सुगंधित फसलों को बढ़ावा देने के लिए संस्थान खास पहल कर रहा है। हालांकि, प्रदेश के 1500 किसान पहले ही सुगंधित फसलों की खेती कर रहे हैं, लेकिन अधिकांश संख्या में किसानों का इसके प्रति रुझान बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि बीते दिनों भद्रवाह कैंपस में किसान जागरूकता कार्यक्रम करवाया गया था। चिनाब वैली के किसानों कार्यक्रम में हिस्सा लेकर सुगंधित फसलोें की खेती करने के गुर सीखे हैं। उन्होंने कहा कि भद्रवाह में सितंबर तक सुगंधित फसलों के 50 लाख पौधे तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि लैवेंडर के आठ लाख पौधे किसानों को वितरित भी किए गए हैं।
नई मशीनें लगाई जाएंगी
भद्रवाह के लिरोत, खुद, मानवा और उधमपुर के टिकरी में नई मशीनें लगाई जाएंगी। इनसे सुगंधित फसलों का तेल निकाला जाएगा। इससे पहले चिनाब वैली में 7 मशीनें लगाई गई थीं। किसानों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए संस्थान हर रोज नई तकनीक को बढ़ावा दे रहा है, ताकि आत्मनिर्भर भारत के तहत किसान खुद का रोजगार कर सकें।
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महंगी कीमत से बिक रहा है सुगंधित फसलों का तेल
जंगली गेंदे का तेल 15000 रुपये किलो, क्लेरी सेज का 20000 रुपये किलो बिक रहा है। इसमें किसान अधिक पैसा कमा रहे हैं। सुगंधित फसलों से प्रदेश में युवा सैनिटाइजर, अग्रबत्ती, मसाले और साबुन आदि उत्पाद तैयार कर रहे हैं, जिन्हें एमॉजोन के माध्यम से बेचा रहा है। विशेषज्ञ ने कहा कि कठुआ के दो युवा बीटैक की पढ़ाई के बाद इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं। वे सुगंधित फसलों से अलग-अलग उत्पाद बनाकर बेच रहे हैं।
कहां कौन सी सुंगधित फसलें उगाई जा रहीं
शोध के अनुसार प्रदेश के डोडा, भद्रवाह, किश्तवाड़ आदि पहाड़ी इलाकों में लैवेंडर और जंगली गेंदे की खेती की जा रही है। वहीं कठुआ, सांबा, रियासी और उधमपुर में लेमनग्रास और रोज मेरी की खेती कारगार साबित हुई है। किसानों सुगमता से अपना रोजगार कर रहे हैं।
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