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केंद्रीय विवि जम्मू में खुला उत्तर भारत का पहला अंतरिक्ष विज्ञान अनुसंधान केंद्र

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जम्मू। केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू में उत्तर भारत का पहला अंतरिक्ष विज्ञान अनुसंधान केंद्र शनिवार को खुल गया। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने अनुसंधान केंद्र का उद्घाटन किया। इस केंद्र में एविएशन एंड एरोनॉटिक्स में बीटेक कोर्स करवाया जाएगा। 60 सीटों की क्षमता वाले कोर्स में इसी साल से आईआईटी-जेईई की प्रक्रिया के तहत दाखिले किए जाएंगे। केंद्रीय मंत्री ने इसे उत्तर भारत में अंतरिक्ष विज्ञान अनुसंधान की दृष्टि से ऐतिहासिक कदम बताया।
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मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अक्तूबर 2018 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के साथ केंद्रीय विवि जम्मू का एमओयू हुआ था। डॉ. सिंह ने कहा कि केरल के बाद देश में अपनी तरह का यह दूसरा केंद्र है, जहां पढ़ाई अनुसंधान कार्य के अलावा अंतरिक्ष विज्ञान की पढ़ाई कर विद्यार्थी इसरो और नासा जैसे प्रतिनिष्ठित संस्थानों में अपने करिअर की उड़ान भर सकेंगे। डॉ. सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अंतरिक्ष विज्ञान पर अनुसंधान के संस्थान अब दक्षिण भारत तक सीमित नहीं रहे। उद्घाटन समारोह में इसरो के चेयरमैन सोमनाथ एस, पूर्व चेयरमैन डॉ. के राधा कृष्णन, आईआईएसटी के निदेशक डॉ. सैम दयाल देव और वीसी संजीव जैन मौजूद रहे।
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डोगरा पृष्ठभूमि से थे सतीश धवन
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जम्मू केंद्रीय विवि में स्थापित केंद्र का नामकरण इसरो के पूर्व अध्यक्ष सतीश धवन के नाम से किया गया है। डोगरा पृष्ठिभूमि के सतीश धवन ऐसे विज्ञानिक थे, जिनकी वजह से इसरो का मुख्यालय बेंगलुरू में बनाया गया। धवन कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में बेंगलुरू में काम कर रहे थे।
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जल संसाधन के बेहतर
इस्तेमाल में मिलेगी मदद
अंतरिक्ष विज्ञान अनुसंधान केंद्र की प्रयोगशाला में खगोल भौतिकी, वातावरण पर नजर रखने वाले यंत्र और ग्लेशियर अध्ययन प्रयोगशाला की सुविधाएं हैं। यह तकनीक ग्लेशियर, बर्फ के रूप में भंडारित जल संसाधन प्रबंधन और इस्तेमाल को और बेहतर तरीके से करने में मदद करेगा।
अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का बुनियादी ढांचा विकसित होगा
केंद्र में अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के लिए बुनियादी ढांचे को विकसित किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर (विज्ञान कूटनीति) वैज्ञानिक और सांस्कृतिक प्रगति में तेजी लाई जाएगी। देश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा (अंतरिक्ष कूटनीति) को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अलावा एसडीसीएसएस में भी अनुसंधान किया जाएगा, जिसमें एनियोनिक, खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी में अनुसंधान होगा। उच्च तापमान, थर्मोमीटर सेंसर, भूंकंप के खतरे, चंद्र विज्ञान, वायुमंडल विज्ञान और जीआईएस आदि पर काम किया जाएगा। वायु प्रदूषण की स्थिति और पूर्वानुमान का मूल्यांकन करने के लिए केंद्र में जीआई एप्लीकेशन की व्यवस्था भी होगी। एनआई ऑप्टोइलेक्ट्रानिक के प्रभावी उपकरणों और आसान निर्माण पर काम होगा।
केंद्र में राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिक भी शोधकार्य करेंगे
इसरो के पूर्व चेयरमैन डॉ. के राधाकृष्णन ने कहा कि विज्ञान के क्षेत्र में तकनीकी रूप से बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय विवि में यह पहला शोध केंद्र है। जिसे 2018 में वीसी अशोक आइमा के कार्यकाल में मंजूरी दी गई थी। कोरोना महामारी के चलते भवन निर्माण की प्रक्रिया धीमी हुई। इस केंद्र के खुलने से केंद्रीय विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान हुई है। वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के लिए केंद्र के साथ एक कांफ्रेंस हाल भी खोला गया है। जिसमें विज्ञानिक शोध संबंधी चर्चा करेंगे। राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिक केंद्र में शोधकार्य कर सकेंगे।
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