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परिसीमन आयोग ने सहयोगी सदस्यों के कुछ सुझावों को किया स्वीकार

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जम्मू। परिसीमन आयोग ने सहयोगी सदस्यों के कुछ सुझावों को स्वीकार कर लिया है। दिल्ली में आयोग की अध्यक्ष जस्टिस (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में वीरवार को हुई बैठक में भाजपा व नेकां सांसदों के प्रत्येक सुझावों पर बिंदुवार चर्चा करते हुए कुछ सुझावों को स्वीकार करने पर सहमति जताई गई।
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सूत्रों ने बताया कि बैठक में सहयोगी सदस्यों के सुझावों पर कई घंटे तक चली बैठक में विचार किया गया। इनमें से कुछ सुझावों को स्वीकार कर लिया गया। आयोग से जुड़े सूत्रों ने बताया कि बैठक में लिए गए फैसले की जानकारी सहयोगी सदस्यों को दी जाएगी। इसके बाद इसे आम जनता के लिए सार्वजनिक किया जाएगा ताकि वे भी अपने सुझाव व आपत्ति दे सकें। सूत्रों के अनुसार अंतरिम रिपोर्ट में जिस सुचेतगढ़ सीट का अस्तित्व समाप्त कर दिया गया था, उसे दोबारा से बहाल करने के भाजपा सांसदों को स्वीकार कर लिया गया है। इसके साथ ही राजोरी सीट से हटाए गए डुंगी इलाके को फिर से राजोरी में शामिल करने का भी फैसला किया गया है।
बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा, जम्मू-कश्मीर के चुनाव आयुक्त केके शर्मा व मुख्य निर्वाचन अधिकारी हृदेश कुमार उपस्थित थे। ज्ञात हो कि भाजपा के सांसदों डा. जितेंद्र सिंह व जुगल किशोर शर्मा ने सुचेतगढ़ विधानसभा सीट का अस्तित्व दोबारा से बहाल करने, परगवाल इलाके को खौड़ के साथ जोड़ने तथा राजोरी-अनंतनाग लोकसभा सीट में शोपियां जिले को भी शामिल करने का सुझाव दिया था। वहीं, नेकां सांसदों डा. फारूक अब्दुल्ला, हसनैन मसूदी व मोहम्मद अकबर लोन ने संयुक्त रूप से आपत्तियां दाखिल की थीं।
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आयोग का कार्यकाल बढ़ा है दो महीने
परिसीमन आयोग का कार्यकाल और दो महीने बढ़ा है। कानून मंत्रालय ने दो दिन पहले अधिसूचना जारी कर कहा था कि आयोग का कार्यकाल दो साल दो महीने का होगा। आयोग का गठन छह मार्च 2020 को किया गया था। पिछले साल एक साल का विस्तार दिया गया था। इसके बाद 22 फरवरी को दो महीने और कार्यकाल बढ़ा दिया गया।
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