जम्मू। कोविड के कारण दो साल तक ऑनलाइन पढ़ाई के बाद बच्चों की स्कूलों में वापसी का समय बेहद संवेदनशील है। मनोचिकित्सकों का कहना है लगातार ऑनलाइन पढ़ाई के लंबे अरसे बाद बच्चों को स्कूलों की व्यवस्था में ढलने में दिक्कतें आएंगी। इसमें शिक्षकों और अभिभावकों की भूमिका बहुत अहम रहने वाली है। सबसे ज्यादा असर छोटे बच्चों के मानसिक स्तर पर पड़ रहा है। बच्चों ने दो साल स्कूल नहीं देखा है और अचानक उनके सामने शिक्षा से जुड़े दबाव की चुनौती आएगी, जिसके साथ ढलने में बच्चों को कुछ समय लगेगा। इस दौरान बच्चों के व्यवहार में कई बदलाव आ सकते हैं।
वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. जगदीश थापा के अनुसार स्कूल खुलने पर छोटी कक्षाओं के बच्चों में गुस्सा बढ़ने, सीखने की आदत न होने, कक्षाओं के वातावरण में न ढलने, बच्चों का पढ़ाई में रुचि न लेने जैसी परिस्थितियां सामने आ सकती हैं। कई शोध में पाया गया है कि ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान बच्चे का दिमाग अपने स्तर पर ही चलता है, जबकि कक्षा में ऐसी पढ़ाई पर एक साथ कई बच्चों का दिमाग चलता है और उसके बेहतर परिणाम आते हैं। बच्चों में संवाद और पूछने की जिज्ञासा बढ़ती है, लेकिन ऑनलाइन में ऐसी सोच विकसित नहीं हो पाती है। इसके साथ बच्चे वर्दी पहनने के अनुशासन, कक्षा में रहने की आदत, शारीरिक गतिविधियों को भूल जाते हैं। ऑफलाइन वातावरण में बच्चे का भावनात्मक और विस्तृत विकास होता है। वह शारीरिक गतिविधियों से जुड़कर मानसिक रूप से भी मजबूत होते हैं। उन्हें ज्ञान मिलता है कि समाज के साथ कैसे रहना है।
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कोविड उपयुक्त व्यवहार समझाना जरूरी
अभिभावकों और शिक्षकों द्वारा बच्चों का बेहतर मार्गदर्शन करने के साथ उन्हें कोविड उपयुक्त व्यवहार को समझाना बेहतर जरूरी है, क्योंकि कोविड का खतरा अभी पूरी तरह से टला नहीं है। बच्चों का टीकाकरण नहीं हुआ है, इसलिए प्रत्येक बच्चे के दिमाग में कोविड से बचाव को लेकर जागरूकता जरूरी है।
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ऐसे करें मार्गदर्शन
1. अभिभावक बच्चों से संवाद बढ़ाएं, उनकी समस्याएं सुनें
2. स्कूल के माहौल में ढलने से जुड़ी समस्या पर बच्चे को प्यार से समझाएं
3. अच्छे व्यवहार के लिए बच्चों को प्रोत्साहित करें, जैसे कि उनके खेलने या टीवी देखने का समय बढ़ा दें। कोई पसंदीदा खाने की चीज दे दें
4. उनको चिल्लाने और गुस्सा करने के नुकसान के बारे में बताएं