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कोरोना महामारी से जूझ रहे पर्यटन क्षेत्र को बजट में विशेष पैकेज की उम्मीद

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जम्मू। जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद पिछले दो साल से केंद्रीय बजट में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को हिस्सेदारी दी जा रही है। वर्ष 2020-21 और 2021-22 के लिए जम्मू-कश्मीर को 30757 करोड़ रुपये (प्रत्येक वर्ष इतनी राशि) और लद्दाख को 5958 (प्रत्येक वर्ष इतनी राशि) करोड़ रुपये केंद्रीय सहायता के रूप में दिए गए। चूंकि जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा पर्यटन पर निर्भर है, लेकिन पिछले दो साल से पर्यटन से जुड़े लोगों की विशेष पर्यटन पैकेज की मांग पर गौर नहीं किया गया है। वर्तमान में भी जम्मू-कश्मीर कोरोना की तीसरी लहर से जूझ रहा है। ऐसे में केंद्रीय बजट में पर्यटन के लिए विशेष पैकेज की घोषणा रामबान का काम कर सकती है। इसके साथ उद्योगपतियों और कारोबारियों को आयकर स्लैब में छूट, जीएसटी के सरलीकरण, प्रदेश में पीएसयू इकाई स्थापित करने आदि घोषणाओं की भी उम्मीद की जा रही है।
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कोरोना की दूसरी लहर से उभरने के बाद जम्मू संभाग में ही वर्ष 2021 में एक करोड़ से ऊपर तीर्थ यात्री और पर्यटक पहुंचे हैं, लेकिन पिछली दो लहरों से पर्यटन क्षेत्र बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। होटल व्यवसाय वालों का कहना है कि पर्यटन से ही उनका व्यवसाय जुड़ा है, लेकिन पिछले दो केंद्रीय बजट में उन्हें कुछ खास नहीं दिया गया है। जम्मू में निर्माणाधीन सुस्त पर्यटन परियोजनाओं को गति देने के लिए विशेष राशि की जरूरत है, तभी कटड़ा और कश्मीर जाने वाले तीर्थ यात्रियों और पर्यटकों को जम्मू में रोका जा सकता है। बजट में उम्मीदों के साथ कारोबारियों को डर भी सता रहा है। उनका मानना है कि बजट में कुछ उत्पादों पर जीएसटी स्लैब को बढ़ाया जा सकता है। जिनकी दर 5 से बढ़ाकर 12 फीसदी की जा सकती है, लेकिन इससे कारोबार प्रभावित होगा।
उद्योगपतियों की मांग है कि बजट में औद्योगिक क्षेत्र में पुरानी व नई इकाइयों को समान आयकर स्लैब में लाया जाए, जो वर्तमान में नहीं है। नई इकाइयों पर 15 फीसदी जबकि पुरानी इकाइयों पर यह दर 25 फीसदी वसूली जा रही है। इसके साथ रोजगार और स्थानीय औद्योगिक इकाइयों को प्रोत्साहित व लाभ गति देने के लिए जम्मू में रेलवे कोच का निर्माण जैसे पीएसयू इकाइयां स्थापित की जाएं। वहीं, कारोबारी प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों की तर्ज पर सामान्य पर उच्चतम आयकर स्लैब को 30 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी करने की मांग कर रहे हैं। कारोबारी नई ट्रेड नीति की भी लंबे समय से मांग कर रहे हैं।
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