जम्मू। जम्मू-कश्मीर में 2-4 आयु वर्ग में 24 फीसदी लड़के और 25 फीसदी लड़कियां ही प्री प्राइमरी शिक्षा ले रहे हैं। ये तथ्य नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 की रिपोर्ट में सामने आए हैं। प्रदेश में प्री प्राइमरी शिक्षा मुख्य रूप से आंगनबाड़ी केंद्रों में दी जाती है। रिपोर्ट में सामने आए तथ्य आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं। प्री प्राइमरी शिक्षा के महत्व को समझते हुए प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने नए सत्र से 8000 स्कूलों में किंडरगार्टन शुरू करने का फैसला लिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक प्री प्राइमरी शिक्षा ले रहे बच्चों में संयुक्त परिवार में रहने वाले बच्चों की संख्या 26 फीसदी और एकल परिवार में रहने वाले बच्चों की संख्या 23 फीसदी है। अनुसूचित जनजाति वर्ग के बच्चों में प्री प्राइमरी शिक्षा का सबसे कम चलन 18 फीसदी, जबकि एससी, ओबीसी वर्ग में 26 फीसदी है। ग्रामीण क्षेत्र में 23, जबकि शहरी क्षेत्रों में 30 फीसदी बच्चे प्री प्राइमरी शिक्षा ले रहे हैं। जिला वार बात करें तो कठुआ में सबसे ज्यादा 49 फीसदी, जबकि रियासी में सबसे कम 9 फीसदी बच्चे प्री प्राइमरी शिक्षा ले रहे हैं।
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6-17 आयु वर्ग में 94 फीसदी बच्चें स्कूल में पढ़ते हैं
जम्मू-कश्मीर में 6-17 आयु वर्ग में 94 फीसदी बच्चों की स्कूूूलों में उपस्थिति है, इसमें शहरी क्षेत्र में 97 और ग्रामीण क्षेत्रों में 94 फीसदी उपस्थिति है। वहीं 6-14 आयु वर्ग में 97 फीसदी बच्चों की स्कूल में उपस्थिति है, इसमें 98 फीसदी शहरी और 97 फीसदी ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। हालांकि 15 से 17 आयु वर्ग में बच्चों की उपस्थिति 87 फीसदी है।