जम्मू। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने एक घंटे के अपने संबोधन में दुनिया के समक्ष चुनौतियों, भारत की भूमिका और भारत को मजबूत बनाने के संबंध में अपने विचार रखे। कहा है कि दुनिया को सुरक्षित बनाना है तो देशों को भारत से सीखना होगा। कोरोना महामारी के दौरान पिछले डेढ़ सालों में दुनिया में पुनर्विचार का दौर जारी है और सतत और समावेशी विकास और पर्यावरण मैत्री जीवन पर बल दिया जा रहा है। विश्व में जो बातें अब करने पर सहमति बनाई जा रही हैं। वह हमारे देशों में सदियों से होती आ रही हैं। ऐसे में दुनिया को सुरक्षित बनाने का रास्ता भारत से ही होकर जाता है।
जम्मू विश्वविद्यालय के जनरल जोरावर सिंह सभागार में प्रबुद्धजनों की विचार गोष्ठी में भागवत ने कहा, 6000 साल पहले भी हमारे देश की भूमि उपजाऊ थी और वह अब भी है। पर्यावरण मैत्री कृषि की संस्कृति भारत की रही है, जबकि अफ्रीकी देशों में जमीन बंजर बन गई है। ऐसा ही हाल कई अन्य देशों में है। भारत इतिहास में आर्थिक तौर पर अग्रणी राष्ट्र रहा है। सिकंदर के आक्रमण के बाद देश में बाहरी पद्धति और भाषाए आईं।
उन्होंने कहा कि समाज में जैसे हम होंगे, वैसे ही हमारे प्रतिनिधि भी होंगे। हमारी आकांक्षाओं के अनुरूप व्यवस्था तभी बनेगी जब हम समाज को अपना समझेंगे। व्यवस्था बनाने में बहुत लोग चाहिए, लेकिन व्यवस्था बिगाड़नी हो तो थोड़े लोग ही बिगाड़ सकते हैं।
उन्होंने कहा, भीड़ को समाज का नाम नहीं दिया जा सकता। समाज का मतलब सामंजस्य है। हम भारत वर्ष के लोग हैं। संपूर्ण भारत वर्ष हमारा है। इस ध्येय के लिए जो मिलजुलकर काम होता है वह समाज है। उन्होंने कहा, मनुष्य ने अपनी सुरक्षा के लिए समूहों में रहना शुरू किया। कबीले बने, गांव बने और फिर प्रदेश। शांति बनाए रखने के लिए राजा बनाया गया। राजा अत्याचारी बन गए तो विद्वानों ने कहा कि ईश्वर सबसे बड़ा है। इसी आधार पर धर्म की व्यवस्था बनी। पश्चिमी देशों में राजा व धर्माचार्यों के झगड़े हो गए। फ्रांस में तो पैसे लेकर धर्माचार्य स्वर्ग के लिए सीटें बुक करने लगे। राजा भी ठीक नहीं, धर्माचार्य भी ठीक नहीं। ऐसी खटपट में नए प्रयोग शुरू हुए, लेकिन मनुष्य को सुख नहीं मिला। नए विवाद नई बिमारियों ने मनुष्य को पीड़ा पहुंचाई। देशों में संघर्ष बढ़े। पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया गया।
भागवत ने कहा हमारे देश में ऋृषि मुनियों ने हमेशा विश्व शांति की बात को आगे बढ़ाया। हमारा देश सदियो पहले अनाज व जमीन के मामले में पूरी तरह सुरक्षित था। कोई बाहरी शक्ति यहां पर हमला करने की सोच नहीं सकती थी। भारत माता और हमारे देवी देवताओं ने जोड़ने वाला तत्व हमे दिया है। हम किसी प्रदेश के कारण राष्ट्र नहीं हैं। सबका साथ, सबका विकास करने वाला हमारा राष्ट्र और धर्म है। बड़ो के आगे झुकना, चरण स्पर्श करने जैसी संस्कृति बाहरी देशो में नहीं है।
भागवत ने कहा, जम्मू-कश्मीर में अब 370 नहीं है। यह मन से भी जाना चाहिए। देश के कई राज्यों में झगड़े हैं। कुछ प्रदेश कावेरी नदी के पानी के लिए खून बहाने की बात करते हैं। व्यवस्था बदलावों के साथ साथ मानसिकता भी बदलनी चाहिए। हमारे देश में हमें इसे चलाना है और दुनिया के लिए चलाना है। हम सबसे प्राचीन संस्कृति हैं और दुनिया को हमसे सीखकर आगे बढ़ना होगा। भाषाएं अनेक होंगी, प्रदेश अनके होंगे लेकिन हमारा भारत एक और इसी भाव के साथ अब आगे बढ़ सकते हैं।
इस अवसर पर उत्तर क्षेत्र संघ चालक सीता राम व्यास, संघ के सह सर कार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र रैना समेत समाज के विभिन्न वर्गों के करीब 600 प्रमुख लोग मौजूद रहे।