पर्यटन, स्वास्थ्य, लॉजिस्टिक्स, हथकरघा, हस्तशिल्प, बागवानी, कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में स्टार्टअप के लिए अपार संभावनाएं है जिसके लिए युवाओं को खुद को तैयार करना चाहिए। जम्मू-कश्मीर में अकादमिक संचालित स्टार्टअप से अर्थव्यवस्था में बदलाव के साथ सुधार होगा। यह बात शनिवार को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) श्रीनगर में राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान कही।
संगोष्ठी में उद्यमशीलता पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने में शिक्षा जगत, उद्योग और नीति निर्माताओं के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। उप राज्यपाल ने जम्मू-कश्मीर स्टार्टअप नीति और समग्र कृषि विकास कार्यक्रम (एचएडीपी) पर प्रकाश डाला, जिससे विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में स्टार्टअप और उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव आएगा।
एलजी ने कहा कि स्टार्टअप विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बीच की खाई को पाटने के साथ रोजगार व लाभ सृजन करता है। उन्होंने छात्रों को अपने उद्यमशीलता के सपने को सच्चाई में बदलने के साथ आर्थिक विकास में योगदान देने के लिए उन्मुख लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रोत्साहित किया।
भावी स्टार्टअप उद्यमियों को उत्पाद पहले के बजाय समस्या पहले पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहाए ताकि उनके विचार विकसित भारत की प्रक्रिया को गति दें। सिन्हा ने कहा, स्टार्टअप के दो महत्वपूर्ण उद्देश्य हैं, सामाजिक परिवर्तन के लिए नई तकनीक का विकास और हस्तांतरण व उद्योग की जरूरतों के अनुसार प्रतिभा पूल का निर्माण करना।
भावी उद्यमियों को गुणवत्ता वाली तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा के साथ प्रशिक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यशाला में प्रो. ए रविंद्रनाथ निदेशक एनआईटी श्रीनगर और कुलपति केंद्रीय विश्वविद्यालय कश्मीर राजेश कुमार पाठक सहित अन्य लोग मौजूद रहे।