जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा
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उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के सलाहकार फारूक खान ने रविवार देर शाम अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्हें भाजपा में बड़ी जिम्मेदारी मिल सरती है। 13 जुलाई 2019 को फारूक खान को तत्कालीन राज्यपाल सत्यपाल मलिक का सलाहकार बनाया गया था। मलिक के प्रदेश से जाने के बाद वह उपराज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू और फिर मनोज सिन्हा के सलाहकार के तौर पर काम कर रहे थे।
प्रदेश के पूर्व आईपीएस अधिकारी फारूक खान भाजपा के राष्ट्रीय सचिव के अलावा लक्षद्वीप के उपराज्यपाल भी रह चुके हैं। फारूक खान ने इस्तीफे की पुष्टि करते हुए कहा कि वह भाजपा के कार्यकर्ता हैं। पार्टी आगे उन्हें जो भी जिम्मेदारी देगी उसे वह बखूबी निभाएंगे।
वहीं, सूत्रों के अनुसार जम्मू-कश्मीर में आगामी विधानसभा चुनाव में फारूक खान को भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व अहम जिम्मेदारी देना चाहता है। फारूक खान जम्मू के विधानसभा चुनाव में भाजपा का प्रमुख मुस्लिम चेहरा हो सकते हैं और उन्हें जम्मू संभाग के राजोरी व पुंछ जिलों और कश्मीर संभाग में संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी मिल सकती है। अनुसूचित जनजाति वर्ग से होने की वजह से वह एसटी वर्ग के लिए आरक्षित सीटों पर भाजपा को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर में जनसंघ की पृष्ठभूमि वाले परिवार से हैं फारूक खान
फारूक खान प्रदेश में जनसंघ की पृष्ठभूमि वाले परिवार से हैं। उन्हें कट्टर राष्ट्रवादी माना जाता है। फारूक खान के दादा कर्नल पीर मोहम्मद खान महाराजा हरि सिंह की सेना में कार्यरत थे और जम्मू-कश्मीर में जन संघ के पहले राज्य अध्यक्ष भी बने। फारूक खान 2013 में जम्मू कश्मीर पुलिस में महानिरीक्षक पद से रिटायर होने के बाद 2014 में भाजपा में शामिल हो गए। उन्हें 2015 में भाजपा का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया था।
एलजी के पास अब केवल एक सलाहकार
एलजी मनोज सिन्हा के सलाहकार फारूक खान के इस्तीफे से अब प्रदेश में एक ही सलाहकार रह गया है। राजीव राय भटनागर ही प्रदेश में अब उपराज्यपाल के इकलौते सलाहकार हैं। सिन्हा के प्रदेश का एलजी बनने पर उनके पास तीन सलाहकार थे जिसमें बसीर अहमद खान को हटा दिया गया था।