जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट की धीमी गति से मंगलवार को हाईकोर्ट की कार्यवाही प्रभावित हुई। हाईकोर्ट ने इसका स्वत: संज्ञान लेते हुए प्रधान गृह सचिव शालीन काबरा को गुरुवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए इंटरनेट की धीमी गति के प्रभाव का असर बताने को कहा है।
हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति संजय धर की पीठ ने आदेश में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के निवासियों के अधिकार से जुड़े जरूरी मुद्दों पर चिंता प्रकट की।
तीन पृष्ठ के आदेश में पृष्ठभूमि बताते हुए पीठ ने कहा कि कोरोना के बढ़ते मामले रोकने के लिए लॉकडाउन लागू होने से वीडियो कांफ्रेंसिंग से मामलों की सुनवाई जरूरी है। आदेश में कहा गया है कि हालांकि हमारे आईटी विशेषज्ञों के पुरजोर प्रयासों के बावजूद सुनवाई संभव नहीं हो पाई।
यह भी पढ़ेंः जम्मू-कश्मीर के दामाद सचिन पायलट को लगा झटका, तो घाटी में शुरू हो गए अटल सरकार के वो किस्से
पीठ ने कहा कि न्याय तक पहुंच मौलिक अधिकार है और इसे अवरूद्ध नहीं किया जा सकता। कहा कि हमारे सामने जो कठिनाई आ रही है इसके मद्देनजर प्रधान गृह सचिव शालीन काबरा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हों और अदालतों के ई-संपर्क पर इंटरनेट की गति पर पाबंदी के असर के बारे में अवगत कराएं।
पीठ ने 11 मई को फाउंडेशन आफ मीडिया प्रोफेशनल बनाम जम्मू कश्मीर प्रदेश व अन्य के खिलाफ याचिका का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन द्वारा संपर्क (कनेक्टिविटी) पाबंदी की समीक्षा करने के लिए कमेटी गठित की थी। पिछले वर्ष पांच अगस्त के बाद से जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट सेवा रोक दी गई थी। इस वर्ष सात जनवरी से चरणबद्ध तरीके से 2जी इंटरनेट को बहाल किया गया है।
अद्भुतः सैलानियों को जन्नत का एहसास कराते हैं ये नजारे, यहीं है 101 तालाबों का संगम, देखें तस्वीरें