लगातार दूसरे वर्ष देश में सबसे ज्यादा जम्मू-कश्मीर में गैरकानूनी (रोकथाम) अधिनियम के तहत मामले दर्ज हुए हैं। कानून के जानकार और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि जम्मू-कश्मीर में केंद्र के सीधे हस्तक्षेप और पुलिस की कमान केंद्र के पास आने से ऐसा हुआ है।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2021 के राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने पूरे देश का आपराधिक रिकॉर्ड जारी किया है। इसमें जम्मू कश्मीर में सबसे अधिक गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के तहत 289 मामले दर्ज हुए हैं, जबकि 2020 में यह मामले 287 थे। इससे पहले 2019 में सिर्फ 255 मामले दर्ज हुए थे।
वर्ष 2021 में देश में कुल 814 मामले दर्ज हुए हैं, जबकि 2020 में 796 मामले दर्ज हुए थे। 2021 में कुल दर्ज 814 मामलों में से जम्मू कश्मीर के बाद मणिपुर का नंबर है, यहां 157 केस दर्ज हुए। असम में 95, झारखंड में 86 और उत्तर प्रदेश में 83 मामले दर्ज हुए हैं।
देश के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां चलाना देश विरोधी तत्वों के खिलाफ आसान नहीं होगा। इस पर पुलिस का शिकंजा मजबूती से कसा जाएगा। पिछले दो सालों के आंकड़े साफ बताते हैं कि ऐसा करने वालों पर अब सख्ती से कार्रवाई होगी। पहले ऐसा करने वालों पर राजनीकि संरक्षण के चलते कार्रवाई बहुत कम होती थी।
अब राजनीतिक संरक्षण नहीं
पहले आतंकी गतिविधियों, देश विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों को राजनीतिक संरक्षण मिलता था। प्रदेश पुलिस पर सीधा हक प्रदेश की सरकार का था, जिसके चलते इनके ऊपर कम कार्रवाई होती थी, लेकिन यूटी बनने के बाद प्रदेश पुलिस की कमान सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय के हाथों में है। एक आतंकवाद ग्रस्त प्रदेश में ऐसा करने वालों पर सख्ती से कार्रवाई होनी चाहिए और ऐसा हो भी रहा है। इनके खिलाफ कसते शिकंजे का ही नतीजा है कि अधिक केस दर्ज हुए हैं। अब जो देश के खिलाफ गैरकानूनी काम करेगा, वो नपा जाएगा।
-एसपी वैद, पूर्व डीजीपी, जम्मू-कश्मीर पुलिस।