जम्मू-कश्मीर व लद्दाख उच्च न्यायालय ने दो साल पहले 1100 ग्राम चरस के साथ गिरफ्तार व्यक्ति की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि जो लोग इस तरह की गतिविधियों में शामिल होते हैं उनमें उस अपराध को दोहराने की प्रवृत्ति होती है।
जम्मू-कश्मीर व लद्दाख उच्च न्यायालय ने लगभग दो वर्ष पहले कुपवाड़ा जिले से एक किलो 100 ग्राम चरस के साथ गिरफ्तार एक व्यक्ति की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि जो लोग इस तरह की गतिविधियों में शामिल होते हैं उनमें उस अपराध को दोहराने की प्रवृत्ति होती है।
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न्यायमूर्ति संजीव कुमार की पीठ ने कहा, याचिकाकर्ता अब्दुल मजीद लोन के पास से बरामद चरस की मात्रा वाणिज्यिक उपयोग की श्रेणी में आती है। यह एनडीपीएस अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है। इसमें कठोरतम कार्रवाई का पूरा प्रावधान है।
याचिकाकर्ता इस अदालत को यह साबित करने में असफल रहा कि मौजूदा सबूतों के आधार पर वह कथित अपराध के लिए दोषी नहीं है अथवा वह जमानत मिलने पर सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। अदालत ने कहा कि मुकदमा अपनी प्रारंभिक अवस्था में है और इसलिए, लोन के पक्ष में जमानत देना उचित नहीं होगा।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार, पुलिस ने उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में 1 मार्च 2020 को हम्पोरा क्रासिंग पर एक नाका लगा रखा था। इस दौरान एक संदिग्ध व्यक्ति ने भागने की कोशिश की। उसे पकड़ लिया गया। अब्दुल मजीद लोन के पास से 1100 ग्राम वजन का चरस जैसा पदार्थ बरामद किया गया। लोन को जेल भेज दिया गया। 11 मई 2020 को एफएसएल श्रीनगर की रिपोर्ट में इसे चरस बताया गया।