स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री चौधरी लाल सिंह के लिंग निर्धारण परीक्षण से प्रतिबंध हटाने के बयान के पीछे मंशा चाहे बेटियों के भविष्य को लेकर सरकार की गंभीरता हो, लेकिन इससे बहस का एक नया मुद्दा रियासत में पैदा हो गया है।
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रविंद्र शर्मा का कहना है कि उन्हें लगता है कि इस मुद्दे को सियासी नजर से नहीं देखा जाना चाहिए और न ही स्वास्थ्य मंत्री की मंशा ऐसी रही होगी। बहरहाल, देश और रियासत में अभी बेटियों का अनुपात बेटों की तुलना में कम है और यह बड़ी चिंता का कारण है।
बेटियों के प्रति समाज में पूरी तरह से जागरूकता और लिंग अनुपात में समानता आने तक इस तरह के कड़े कानून की जरूरत है। स्वास्थ्य मंत्री के पास अगर बेहतर फार्मूला है तो वह केंद्र सरकार को सुझाएं। केंद्र में भी भाजपा की सरकार है।
नेशनल पैंथर्स पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष बलवंत सिंह मनकोटिया का कहना है कि फिलहाल देश और रियासत में लिंग निर्धारण परीक्षण पर प्रतिबंध सही है। ऐसा इसलिए है कि बेटों के मुकाबले बेटियां कम हैं। अगर प्रतिबंध हटा दिया गया तो लोगों को खुली छूट मिल जाएगी।
देश में जागरूकता लाया जाना बेहद जरूरी है। इसके लिए सरकारी और गैर सरकारी स्तर पर प्रयासों की जरूरत है। उपमुख्यमंत्री एवं भाजपा नेता डा. निर्मल सिंह के अनुसार उन्हें स्वास्थ्य मंत्री चौधरी लाल सिंह के इस संबंध में बयान की जानकारी नहीं है।