वाणिज्यिक दरों पर किराया क्यों नहीं लिया
खंडपीठ ने निर्देश दिया कि इस्टेट विभाग अदालत को यह भी बताएगा कि ये 43 व्यक्ति उस समय से सहायक दस्तावेजों/रसीदों के साथ कितना किराया दे रहे हैं। यह आधिकारिक आवास हैं और उनसे वाणिज्यिक दरों पर किराया क्यों नहीं लिया गया है क्योंकि वे वर्तमान में किसी पद पर नहीं हैं।
सभी के पास जम्मू में अपना घर
एडवोकेट शकील अहमद ने खंडपीठ का ध्यान 23 फरवरी, 2024 की नवीनतम स्थिति रिपोर्ट की ओर आकर्षित किया और अवगत कराया कि लगभग सभी पूर्व विधायकों के पास जम्मू में अपने घर हैं, लेकिन इस्टेट विभाग राजनीतिक प्रभाव में उक्त कब्जेदारों को बेदखल नहीं कर रहा है।
इस्टेट विभाग ने दोहरे मापदंड अपनाए
एडवोकेट शकील अहमद ने विशेष रूप से पूर्व सीएम गुलाम नबी आजाद, पूर्व डिप्टी सीएम कविंदर गुप्ता, पूर्व मंत्री सज्जाद लोन के मामलों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि राजनीतिक विचारों पर इस्टेट विभाग द्वारा दोहरे मानक अपनाए गए हैं और देश के कानून को खारिज कर दिया गया है।