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हालात नहीं, हौसले तय करते हैं मंजिल: नीट में चमकी जम्मू-कश्मीर की मेधा, टॉपर्स बोलें-सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं

Sat, 18 Jul 2026 11:18 AM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू/श्रीनगर/ शोपियां

सार

जम्मू-कश्मीर के कई छात्रों ने कठिन परिस्थितियों और लगातार मेहनत के दम पर नीट परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर अपने सपनों को नई उड़ान दी।
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नीट यूजी परिणाम 2026। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नीट का रिजल्ट सिर्फ रैंक और अंकों की कहानी नहीं होता। इसके पीछे महीनों की मेहनत, अधूरी रातें, परिवार का भरोसा और खुद पर विश्वास छिपा होता है। इस बार जम्मू-कश्मीर के कई होनहारों ने शानदार प्रदर्शन कर यह साबित किया कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर इरादे मजबूत हों तो मंजिल जरूर मिलती है।

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अमर उजाला ने इन छात्रों से उनकी तैयारी, संघर्ष और सफलता के सफर पर बात की। हर किसी का तरीका अलग था, लेकिन एक बात सबमें समान थी लगातार मेहनत और खुद पर भरोसा। परिवार की पहली डॉक्टर बनने जा रही हैं कनिष्का : जम्मू के मीरां साहिब की रहने वाली कनिष्का ऋषि ने 92 प्रतिशताइल हासिल की है। पिता के निधन के बाद उनकी मां गिरिजा ऋषि ने परिवार की जिम्मेदारी संभाली। अब कनिष्का अपने परिवार की पहली डॉक्टर बनने जा रही हैं।

वह बताती हैं कि तैयारी के दौरान किसी भी विषय को हल्के में नहीं लिया। हर टॉपिक के अलग नोट्स बनाए, समय-समय पर मॉक टेस्ट दिए और सबसे ज्यादा ध्यान रिवीजन पर रखा। उनका कहना है कि जितनी बार पढ़ा हुआ दोहराएंगे, परीक्षा में उतना ही आत्मविश्वास रहेगा।

घड़ी नहीं, टॉपिक देखकर पढ़ाई करती थीं प्राची
जम्मू के मीरां साहिब की रहने वाली प्राची ने 91.3 प्रतिशताइल हासिल की है। उनके पिता पुलिस इंस्पेक्टर हैं और मां गृहिणी हैं। वह भी अपने परिवार की पहली डॉक्टर बनने जा रही हैं।

प्राची मुस्कुराते हुए बताती हैं कि उन्होंने कभी घड़ी देखकर पढ़ाई नहीं की। अगर कोई टॉपिक शुरू किया तो उसे पूरा किए बिना नहीं उठीं। कई बार रात कब सुबह में बदल गई, इसका भी पता नहीं चला। पहली बार नीट की परीक्षा अच्छी गई थी लेकिन परीक्षा रद्द होने पर वह काफी निराश हुईं। शिक्षकों और परिवार ने हिम्मत बंधाई, जिसके बाद उन्होंने दोबारा तैयारी की। उनका कहना है, मॉक टेस्ट जरूर दीजिए लेकिन जरूरी है
अपनी गलतियों को समझकर उन्हें सुधारना।

मां की सीख बनी सबसे बड़ी ताकत
शोपियां के मुकीम ने ऑल इंडिया रैंक 16000 हासिल की। वह बताते हैं कि उनकी मां हमेशा कहती थीं कि पढ़ाई करते समय पूरा ध्यान सिर्फ अपने लक्ष्य पर होना चाहिए। उन्होंने उसी बात को अपनी आदत बना लिया। मुकीम का कहना है कि सफलता किसी एक दिन की मेहनत से नहीं मिलती। रोज की छोटी-छोटी कोशिशें ही बड़े नतीजे देती हैं। अब उनका सपना एक ऐसा डॉक्टर बनने का है, जिस पर लोग भरोसा कर सकें।

लक्ष्य से नजर नहीं हटाई
शोपियां के फैजान ने ऑल इंडिया रैंक 8033 हासिल की है। वह अपनी सफलता का श्रेय मेहनत, अनुशासन और खुद पर भरोसा रखने को देते हैं। फैजान कहते हैं कि तैयारी के दौरान कई बार ऐसा लगता है कि मंजिल बहुत दूर है, लेकिन ऐसे समय में हार नहीं माननी चाहिए। उनका कहा कि अपने लक्ष्य पर ध्यान रखिए, रोज मेहनत कीजिए और खुद पर भरोसा बनाए रखिए। मेहनत का फल देर से मिल सकता है, लेकिन मिलता जरूर है। उनका मानना है कि डॉक्टर बनना सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि लोगों की सेवा करने की जिम्मेदारी भी है।

उम्मीद नहीं छोड़ी, प्रदेश में बनी नंबर वन 
अनंतनाग के डायलगाम की रहने वाली हादिया निसार ने जम्मू-कश्मीर में पहला स्थान हासिल किया। वह कहती हैं कि यह सफलता उनके लिए जितनी खुशी की बात है, उतनी ही भावुक करने वाली भी। पिछले कुछ समय में हालात आसान नहीं थे, लेकिन उन्होंने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी। हादिया बताती हैं कि 11वीं से ही कोचिंग के साथ जेईई के पिछले वर्षों के प्रश्न हल करने शुरू कर दिए थे। उस समय यह सिर्फ अभ्यास था, लेकिन बाद में यही उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया। 2025 के कठिन पेपर और री-नीट के दौरान इस तैयारी का पूरा फायदा मिला। वह कहती हैं कि अपनी तरफ से पूरी मेहनत कीजिए, बाकी भगवान पर छोड़ दीजिए। मेहनत कभी बेकार नहीं जाती। अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय वह अपने माता-पिता को देती हैं, जिन्होंने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया।

सोशल मीडिया पर भी रहे, पढ़ाई की लय नहीं टूटने दी 
अनंतनाग के अच्छाबल के तेलवनी गांव के रहने वाले जैदान वानी ने ऑल इंडिया रैंक 124 हासिल की। प्रदेश में उनकी दूसरी रैंक है। जैदान का कहना है कि वे सोशल मीडिया भी इस्तेमाल करते थे, लेकिन पढ़ाई की नियमितता कभी नहीं टूटी। उनके मुताबिक, नीट जैसी परीक्षा में घंटों गिनने से ज्यादा जरूरी है कि जो पढ़ें, उसे अच्छी तरह समझें। वह कहते हैं कि अगर कॉन्सेप्ट मजबूत हैं तो सफलता जरूर मिलती है।
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बिना कोचिंग नीट पास, रोज 60 किमी तय कर मंजिल तक पहुंची मेधावी पलक
सांबा के पुरमंडल के मंडला गांव की पलक मांडला ने बिना किसी कोचिंग के पहले ही प्रयास में नीट पास कर डॉक्टर बनने की राह आसान कर ली। बीएससी की पढ़ाई के साथ वह रोज करीब 60 किलोमीटर का सफर तय कर कॉलेज जाती थीं। आने-जाने में करीब चार घंटे लगते थे लेकिन उन्होंने पढ़ाई की रफ्तार कभी धीमी नहीं पड़ने दी। पलक बताती हैं कि उन्होंने सेल्फ स्टडी, नियमित अभ्यास और समय का पूरा सदुपयोग करते हुए नीट की तैयारी की। उनका कहना है, अगर लक्ष्य साफ हो और रोज ईमानदारी से मेहनत की जाए तो हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों, सफलता जरूर मिलती है। पलक के पिता पीएचई विभाग में डेली वेजर कर्मचारी हैं। उनका 72 महीने का वेतन अब भी बकाया है लेकिन परिवार ने कभी आर्थिक तंगी को बेटी की पढ़ाई के आड़े नहीं आने दिया। पलक की इस कामयाबी ने पूरे पुरमंडल क्षेत्र, खासकर ग्रामीण बेटियों को यह भरोसा दिया है कि बड़े सपने पूरे करने के लिए महंगी कोचिंग नहीं, बल्कि मजबूत इरादे और लगातार मेहनत सबसे ज्यादा जरूरी होती है।
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