महबूबा मुफ्ती ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं से केंद्र सरकार का संवाद नहीं करना एक औपनिवेशिक मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक सरकार का युवाओं की समस्याओं के प्रति इतना उदासीन रवैया चिंता का विषय है।
उन्होंने सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन अनशन का जिक्र करते हुए कहा कि वह नीट परीक्षा में अनियमितताओं के मुद्दे को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
बता दें कि जंतर-मंतर पर कॉकरेच जनता पार्टी (सीजेपी) की ओर से नीट परीक्षा में गड़बड़ियों के विरोध में प्रदर्शन किया जा रहा है। यह आंदोलन 20 जून से शुरू हुआ था, जबकि सोनम वांगचुक 28 जून से इसमें शामिल हुए और इसके बाद से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।
प्रदर्शनकारी संगठन ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के साथ परीक्षा अनियमितताओं के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक करोड़ की मुआवजा देने की मांग की है। संगठन ने 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन शांतिपूर्ण मार्च निकालने का भी आह्वान किया है।
वहीं, अनशन के 20वें दिन सोनम वांगचुक ने कहा कि वह हर हाल में 20 जुलाई तक जीवित रहेंगे। डॉक्टरों ने उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता जताई है और लंबे समय तक अनशन जारी रहने पर अंगों को नुकसान पहुंचने की आशंका व्यक्त की है। हालांकि, वांगचुक ने सरकार की ओर से प्रतिक्रिया नहीं मिलने तक अनशन खत्म करने से इनकार कर दिया है।