कुलगाम जिले का वानपोह मिनी बिहार के नाम से भी जाना जाता है। यहां काफी संख्या में प्रवासी मजदूर रहते हैं। जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर वानपोह के लगभग सभी घरों में किराए पर मजदूर रहते हैं। यह खेतों में मजदूरी के साथ ही विभिन्न निर्माण कार्यों, पेटिंग, कारपेंटर, सेब के बगीचे में काम करते हैं।
प्रवासी मजदूरों में दहशत का माहौल
घाटी में एक के बाद एक टारगेट किलिंग की घटनाओं से प्रवासी मजदूरों में दहशत का माहौल है। रोजी-रोजगार के सिलसिले में बिहार, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश व ओडिशा से घाटी में आए मजदूरों और रेहड़ी फड़ी वालों ने अब अपने घर का भी रुख कर लिया है। हालांकि, दिवाली तथा छठ पर्व के दौरान वैसे भी बिहार व उत्तर प्रदेश के मजदूर घर लौटते हैं, लेकिन ताजा वारदातों से समय से पहले ही प्रवासी मजदूर लौटने शुरू हो गए हैं। प्रवासी लोग मजदूरी के साथ ही छोटे मोटे रेहड़ी लगाकर अपना जीविकोपार्जन करते हैं। यह उत्तरी कश्मीर से लेकर मध्य और दक्षिणी कश्मीर तक फैले हुए हैं।