पानी में फ्लोराइड की मात्रा निर्धारित स्तर से ज्यादा होने पर इसका सेवन करने वाले के दांत पीले पड़ने लगते हैं। कैल्शियम कारबोनेट की मात्रा अधिक होने पर शरीर में पथरी बनने लगती है। इसी तरह से नाइट्रेट की मात्रा ज्यादा होने पर ब्लू बेडी सिंड्रोम की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। इस बीमारी में नवजात का शरीर पीला पड़ने लगता है।
20 छात्रों ने जुटाए सैंपल
एमएससी छात्रों ने अलग-अलग क्षेत्रों से जुटाए पानी के सैंपल केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू के पर्यावरण विभाग के बीस छात्रों ने दो साल में डोडा, उधमपुर, कठुआ और सांबा से पानी के सैंपल जुटाए। इनकी जांच डॉ. पंकज मेहता ने की है।
पथरी, दंतरोग, ब्लू बेबी सिंड्रोम जैसी बीमारियों से बचाने के लिए सरकार को प्रभावित इलाकों में पानी ट्रीट करवाना होगा। पानी में औषधियां डालनी होंगी। इसके लिए पंचायत स्तर पर कम्यूनिटी आरओ सिस्टम लगाने होंगे। पानी की वैज्ञानिक जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। लोगाें को भी जागरूक करना होगा।- डॉ. पंकज मेहता, सहायक प्रोफेसर, पर्यावरण विभाग केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू
फ्लोराइड कंटेंट ज्यादा होने से दांत पीले पड़ जाते हैं। जब फ्लोराइट कंटेंट वन पार्ट पर मिलियन से ज्यादा होता है। तब इस बीमारी का खतरा रहता है।- डॉ. राकेश गुप्ता, प्रिंसिपल डेंटल कॉलेज जम्मू