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जम्मू कश्मीर विधानसभा सत्र होगा हंगामेदार

Tue, 10 Mar 2015 01:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
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मसर्रत आलम की रिर्हाई से लेकर जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव के शांतिपूर्ण होने का श्रेय पाकिस्तान, आतंकवादी और अलगाववादी संगठनों को देने के लिए मुख्यमंत्री के विवादास्पद बयानों पर गठबंधन सरकार को विधानसभा सत्र में घेरने की रणनीति में नेकां-कांग्रेस जुट गई है।
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अठारह मार्च से शुरू हो रहे पहले विधानसभा सत्र में दोनों पार्टियों के वैचारिक मतभेदों तक पर शोर-शराबा हो सकता है। नेशनल कांफ्रेंस के महासचिव एवं पूर्व मंत्री अली मोहम्मद सागर का कहना है कि बड़ी-बड़ी बातें करने वाली भाजपा को अब जवाब देना होगा।

विधानसभा में भाजपा हो या पीडीपी इससे विभिन्न मुद्दों पर नेकां जवाब मांगेगी। राजनीतिक कैदियों की रिहाई पर भी सवाल पूछे जाएंगे। अब जवाब देने की बारी पीडीपी और भाजपा की है।
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कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता शफीक मीर का कहना है कि मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने शपथ ग्रहण समारोह के बाद ही अपने इरादे साफ कर दिए थे। वह अपने एजेंडे पर काम कर रहे हैं।
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गठबंधन सरकार में सहयोगी दल भाजपा को इसका जवाब देना होगा कि न्यूनतम साझा कार्यक्रम कहां गया। भाजपा राष्ट्रवाद की बात करती रही है।

जम्मू के लोगों को सब्जबाग दिखाकर पीडीपी के साथ सत्ता में आई है। विधानसभा में पीडीपी और भाजपा से कांग्रेस सवाल पूछेगी।
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