पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबिया सईद के अपहरण तथा श्रीनगर में चार वायु सेना कर्मियों की हत्या से संबंधित 30 साल पुराने मामले में विशेष अदालत में शनिवार को जिरह की प्रक्रिया शुरू हुई। इन दोनों मामलों में जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक आरोपी है, जो तिहाड़ जेल से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ा। विशेष अदालत में प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों का परीक्षण शुरू किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि दोनों मामलों में अभियोजन पक्ष के प्रत्यक्षदर्शी अब्दुल रहमान सोफी और वायु सेना कर्मियों की हत्या के आरोपी सलीम उर्फ नानाजी को अदालत में पेश किया गया। यासीन मलिक पर अन्य अभियुक्तों के साथ इन दोनों मामलों में अलग-अलग आरोप दर्ज हैं। अधिकारियों ने बताया कि कुछ देर बाद पूछताछ रोक दी गई क्योंकि अन्य आरोपी अदालत में नहीं पहुंच सके। उनके वकीलों ने कहा कि कश्मीर घाटी में अशांति के चलते उनके मुवक्किल अदालत में पेश नहीं हो पाए।
इन मामलों में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की ओर से मुख्य अभियोजक के तौर पर पेश हुई मोनिका कोहली ने एजेंसी की तरफ से पूछताछ की। मोनिका सात साल से कोर्ट में सीबीआई का प्रतिनिधित्व कर रही हैं और उन्होंने कश्मीर घाटी में आतंकवाद का दौर शुरू होने के साथ 1989-90 में हुए इन दोनों सनसनीखेज मामलों को ट्रायल तक पहुंचाने में सफल रही।
मलिक ने खुद जिरह की पेशकश की
टेरर फंडिंग के मामले में गिरफ्तार यासीन मलिक अप्रैल 2019 से तिहाड़ जेल में है। उसने कोर्ट से कहा था कि वह खुद गवाहों से जिरह करना चाहता है और किसी वकील की मदद नहीं लेगा। 25 जनवरी 1990 को वायुसेना के चार जवानों की हत्या में मलिक और छह अन्य के खिलाफ पिछले साल 16 मार्च को आरोप तय किए गए थे। अन्य आरोपियों में अली मोहम्मद मीर, मंजूर अहमद सोफ ी उर्फ मुस्तफा, जावेद अहमद मीर उर्फ नलका, शौकत अहमद बख्शी, जावेद अहमद जरगर और नानाजी शामिल हैं। सीबीआई ने अगस्त 1990 में वायुसेना कर्मियों की हत्या में आरोप पत्र दायर किया था। सीबीआई के अनुसार वायु सेना के जवानों पर आतंकवादियों ने गोलियां चलाईं जिसमें एक महिला सहित 40 गंभीर रूप से घायल हो गए। इनमें से चार की मौके पर ही मौत हो गई।
रुबिया सईद अपहर में मलिक समेत 10 पर आरोप
1989 में रुबिया सईद के अपहरण में अदालत ने इस साल 11 जनवरी को मलिक और नौ अन्य के खिलाफ आरोप तय किए थे। उन सभी पर हत्या, हत्या के प्रयास और अब समाप्त हो चुके टाडा अधिनियम की धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। मामले में मलिक और अन्य के खिलाफ ट्रायल का रास्ता अप्रैल 2019 में साफ हो गया था जब हाईकोर्ट ने 2008 के सुनवाई श्रीनगर स्थानांतरित करने के आदेश को खारिज कर दिया था।
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अपहरण मामले में अदालत ने मलिक और नौ अन्य के खिलाफ आरोप तय किए। इसमें अली मोहम्मद मीर, मोहम्मद जमां मीर, इकबाल अहमद गंदरू, जावेद अहमद मीर, मोहम्मद रफीक पहल, मंजूर अहमद सोफी, वजाहत बशीर, मेहराजुद्दीन शेख और शौकत अहमद बख्शी शामिल हैं। सीबीआई ने दो दर्जन आरोपियों के खिलाफ टाडा कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किया था।
इसमें जेकेएलएफ के टॉप कमांडर मोहम्मद रफीक डार व मुश्ताक अहमद लोन की मौत हो गई जबकि 12 फरार हैं। फ रार आरोपियों में हलीमा, जावेद इकबाल मीर, मोहम्मद याकूब पंडित, रियाज अहमद भट, खुर्शीद अहमद डार, बशारत रहमान नूरी, तारिक अशरफ , शफात अहमद शांगलू, मंजूर अहमद, गुलाम मोहम्मद टपलू, अब्दुल मजीद भट और निसार अहमद भट हैं।