जम्मू-कश्मीर में विशेष लोगों की सुरक्षा के लिए गठित विशेष सुरक्षा समूह (एसएसजी) का सरकार ने आकार घटाना शुरू कर दिया है। इसके तहत डीजीपी दिलबाग सिंह ने मंगलवार को 77 पुलिसकर्मियों को एसएसजी से विभिन्न सुरक्षा विंग में स्थानांतरित कर दिया। इसमें इंस्पेक्टर, असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर से लेकर हेड कांस्टेबल व सीनियर ग्रेड कांस्टेबल तक शामिल हैं। विभिन्न यूनिटों से एसएसजी में स्थानांतरित पांच कर्मियों के आदेश को स्थगित कर दिया गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
इस समूह को मुख्यमंत्रियों, पूर्व मुख्यमंत्रियों और उनके परिवार की सुरक्षा में लगाया जाता है। केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन की ओर से 2000 में स्थापित इस समूह की इकाई के आकार को कम करने का फैसला किया गया है। एसएसजी की संख्या को न्यूनतम तक कम करके इसे सही आकार दिया जाना है।
जवानों को जम्मू-कश्मीर पुलिस की सुरक्षा शाखा में तैनात किया जाएगा
इसका नेतृत्व पुलिस अधीक्षक के पद से नीचे के एक अधिकारी द्वारा किया जाएगा जबकि निदेशक पुलिस महानिरीक्षक और उससे ऊपर के रैंक का होगा। एसएसजी के कुछ जवानों को जम्मू-कश्मीर पुलिस की सुरक्षा शाखा में तैनात किया जाएगा। शेष एसएसजी कर्मियों को अन्य विंगों में तैनात किए जाने की संभावना है ताकि पुलिस बल उनके प्रशिक्षण और ज्ञान का सर्वोत्तम उपयोग कर सके। पुलिस के सुरक्षा विंग को वाहन और अन्य गैजेट्स ट्रांसफ र किए जाएंगे।
केंद्र सरकार की ओर से जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (राज्य कानूनों को अंगीकृत) आदेश 2020 में 31 मार्च 2020 को संशोधन किया गया था, जिसमें जम्मू-कश्मीर के विशेष सुरक्षा समूह अधिनियम में संशोधन किया गया था। इसके तहत पूर्व मुख्यमंत्रियों और उनके परिवारों को एसएसजी सुरक्षा प्रदान करने वाले एक खंड को हटा दिया। एसएसजी को अब सेवारत मुख्यमंत्रियों और उनके परिवार के सदस्यों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
फारूक, आजाद, उमर व महबूबा का हटेगा एसएसजी सुरक्षा कवच
प्रदेश के चार पूर्व मुख्यमंत्रियों डॉ. फारूक अब्दुल्ला, गुलाम नबी आजाद, उमर अब्दुल्ला व महबूबा मुफ्ती की विशेष सुरक्षा समूह (एसएसजी) सुरक्षा हटने की संभावना है। एसएसजी का आकार घटाने के फैसले से ऐसा संभव होगा। हालांकि, फ ारूक अब्दुल्ला और आजाद को राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (ब्लैक कैट कमांडो) का सुरक्षा कवच प्रदान किया जाना जारी रहेगा, क्योंकि ये दोनों जेड प्लस सुरक्षा प्राप्त हैं। इसी प्रकार उमर अब्दुल्ला और महबूबा को जम्मू-कश्मीर में जेड प्लस सुरक्षा मिलती रहेगी, लेकिन केंद्र शासित प्रदेश के बाहर सुरक्षा कम होने की संभावना है।