कहते हैं कि दूसरों के लिए कुछ करने को कोई बड़ा ओहदा जरूरी नहीं है, बल्कि इंसानियत होनी चाहिए। कुछ इसी को चरितार्थ सरकारी मेडिकल कालेज (जीएमसी) जम्मू के फिजियोलाजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. रितु गुप्ता (52) ने किया है।
गत दिवस कुछ शारीरिक समस्याओं के बाद हृदयगति रुकने से डॉ. गुप्ता की मौत हो गई। परिवारवालों ने उनके नेत्रदान करके उनकी आखिरी इच्छा को पूरा किया। मौत के बाद उनके दोनों कॉर्निया लेकर दो पुरुष मरीजों के जीवन में नई रोशनी दी गई। जीएमसी में किसी डॉक्टर द्वारा मौत के बाद कॉर्निया दान करने का अपनी तरह का यह पहला मामला है। उनकी मौत से संकाय सदस्य और अन्य स्टाफ स्तब्ध है।
बत्रा अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ गांधीनगर निवासी डॉक्टर रवींद्र के. गुप्ता (पति) ने बताया कि 4-5 माह पहले घर पर मैं डॉ. रितु, बहन और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ प्रत्यारोपण को लेकर चर्चा की थी। तब डॉ. रितु ने कहा था कि प्रत्यारोपण के लिए अंगदान की कमी के कारण कई मरीजों को परेशानी होती है। अब जीएमसी में भी अज्ञात या अन्य शव नहीं रहते हैं, जिससे अनाटमी में मेडिकल विद्यार्थियों को पढ़ाई में परेशानी होती है।
डॉक्टर रवींद्र ने आगे बताया, डॉ. रितु ने अपने जीवन के बाद अंगदान की इच्छा जताई थी। तब मैंने उससे संकल्प फार्म लाने को कहा था, ताकि हम सभी भर सकें। हालांकि उसे फार्म नहीं लाए। बुधवार को सुबह 8.20 बजे उनकी जीएमसी में मौत हुई। तब मैंने उनकी अंगदान की आखिरी इच्छा को पूरा करने के लिए नेत्रदान करने को कहा। मेरे सामने मेरी पत्नी का शव था और डॉक्टर मेरे मुंह से उसके नेत्रदान के अनुरोध को सुनकर हैरान थे। तब डॉक्टरों ने कुछ इसमें थोड़ा समय लगेगा। हमें प्रत्यारोपण वाले मरीजों को बुलाना होगा। तब मैंने कहा कि नेत्रदान की प्रक्रिया क्या घर पर हो सकती है। तब उन्होंने बताया कि यह संभव है। हम रितु के शव को लेकर 9 बजे घर पर आ गए और 10.30 बजे जीएमसी ने नेत्र लेने एक चिकित्सा टीम पहुंच गई।
उस समय घर पर माहौल गमगीन था। जब हमने डॉ. रितु के नेत्रदान की बात कही तो कई महिलाओं ने इसका विरोध किया, लेकिन मैने आगे बढ़कर उनसे प्रार्थना की कि यह डॉ. रितु की आखिरी इच्छा थी। टीम ने 15-20 मिनट में डॉ. रितु के कॉर्निया निकाले और उसी दिन शाम को संस्कार कर दिया, लेकिन मुझे दिल में सुकून है कि मैं पत्नी की अंगदान करने की आखिरी इच्छा को पूरा कर पाया। डॉ. रितु अपने पीछे एक बेटी छोड़ गई हैं।
अंगदान के लिए सभी संकल्प लें: एचओडी
जीएमसी जम्मू नेत्र विभाग के विभागीय अध्यक्ष डॉ. सतीश गुप्ता ने बताया कि डॉ. रितु के कॉर्निया से हमने दो मरीजों के जीवन में नई रोशनी दी है। डॉ. रितु ने जो नेक काम किया है, उसे हम सभी लोगों को करने का संकल्प लेना चाहिए। प्रत्यारोपण के लिए अंगदान की जरूरत बढ़ी है।
सलाहकार ने दुख जताया
उपराज्यपाल के सलाहकार राजीव राय भटनागर ने डॉ. रितु गुप्ता के निधन पर दुख जताया है। उन्होंने कहा कि डॉ. रितु एक उत्कृष्ट शिक्षिका थी जिन्होंने हमेशा अपने छात्रों और अन्य लोगों के प्रति सहानुभूति दिखाई। वह हमेशा जरूरतमंद मरीजों की मदद के लिए आगे रहती थीं।