केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री भगवंत किशनराव कराड ने कहा कि अलग-अलग बैंकों के बोर्ड उन खातों पर जुर्माना माफ करने का फैसला कर सकते हैं जो न्यूनतम बैलेंस नहीं रखते हैं। उन्होंने कहा, बैंक स्वतंत्र निकाय हैं। उनके पास बोर्ड हैं जो जुर्माना माफ करने का फैसला ले सकते हैं। दरअसल मंत्री एक सवाल का जवाब दे रहे थे कि क्या केंद्र बैंकों को उन खातों पर कोई जुर्माना नहीं लगाने का निर्देश देने पर विचार करेगा, जिनमें न्यूनतम राशि नहीं है।
कराड केंद्र शासित प्रदेश में विभिन्न वित्तीय योजनाओं के कार्यान्वयन की समीक्षा के लिए दो दिवसीय दौरे पर थे। उन्होंने कहा कि जम्मू एंड कश्मीर में बैंकों ने वर्षों से अच्छा काम किया है। निर्देश दिया कि वे उन मानकों पर अपने प्रदर्शन में सुधार करें जहां वे राष्ट्रीय औसत से पीछे हैं। उन्होंने कहा, बैंक जन धन योजना खातों के प्रतिशत को राष्ट्रीय औसत के करीब लाने के लिए शनिवार को शिविर आयोजित करें। राष्ट्रीय औसत 49,135 प्रति लाख जनसंख्या है, वहीं जम्मू और कश्मीर में यह संख्या 21,252 प्रति लाख है। कराड ने कहा, जम्मू और कश्मीर में ऋण-जमा अनुपात 58 प्रतिशत है और इसे बढ़ाने की जरूरत है।
मंत्री ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि कठिन इलाके के बावजूद जम्मू और कश्मीर में एक भी गांव ऐसा नहीं है जहां बैंक संचार न हो। उन्होंने कहा, जम्मू और कश्मीर के सभी गांवों के पांच किलोमीटर के दायरे में एक बैंक कोरेस्पोंडेंट है। मंत्री ने कहा कि उन्होंने सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्र के बैंकों से जम्मू-कश्मीर में अपनी उपस्थिति बढ़ाने को कहा है।
कराड ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में प्रत्येक एक लाख की आबादी पर अधिक बैंक शाखाएं और एटीएम खोलने की आवश्यकता है क्योंकि केंद्र शासित प्रदेश में देश के बाकी हिस्सों की तुलना में जनसंख्या घनत्व कम है। उन्होंने कहा, बैंकों ने मार्च 2023 तक 20 नई शाखाएं खोलने का वादा किया है। इनमें से चार शाखाएं आज खोली गईं जबकि तीन नए एटीएम का भी उद्घाटन किया गया।
कराड ने कहा कि जनता के बीच वित्तीय साक्षरता और वित्तीय समावेशन मोदी सरकार के शीर्ष फोकस क्षेत्र थे। उन्होंने कहा, विभिन्न ऋ ण योजनाओं के बारे में जनता के बीच अधिक जागरूकता पैदा करने के लिए हमने नाबार्ड के माध्यम से आकांक्षी जिलों कुपवाड़ा और बारामुला के लिए दो वैन स्वीकृत की हैं, जो इन क्षेत्रों में वित्तीय साक्षरता के अभियान का खर्च वहन करेगी।