आरपीएफ अधिकारियों ने बुधवार को कहा कि प्रदेश में सक्रिय कुल आतंकियों में 60 फीसदी स्थानीय युवा शामिल हैं। इस समय केंद्र शासित प्रदेश में करीब 150 से 163 आतंकी सक्रिय हैं इसमें 85 विदेशी बताए जा रहे हैं जिसमें अधिकांश पाकिस्तानी है। इनकी संख्या पिछले दो वर्षो में तेजी से बढ़ी है।
पिछले दो वर्षो में जम्मू-कश्मीर में आतंकी समूहों में भर्ती होने वालों में स्थानीय युवाओं की बढ़ती संख्या सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय है। आरपीएफ अधिकारियों ने बुधवार को कहा कि प्रदेश में सक्रिय कुल आतंकियों में 60 फीसदी स्थानीय युवा शामिल हैं। इस समय केंद्र शासित प्रदेश में करीब 150 से 163 आतंकी सक्रिय हैं इसमें 85 विदेशी बताए जा रहे हैं जिसमें अधिकांश पाकिस्तानी है। इनकी संख्या पिछले दो वर्षो में तेजी से बढ़ी है।
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इससे पहल कश्मीर घाटी और जम्मू के कुछ हिस्सों में आंकड़ा उल्टा होता था। 60-70 प्रतिशत आतंकवादी विदेशी हुआ करते थे। सूत्रों ने कहा कि यह चिंता का विषय तो है लेकिन सुरक्षा बलों को इसका श्रेय भी जाता है कि स्थिति नियंत्रण में है।
सीआपरपीएफ सूत्रों ने कहा कि स्थानीय युवाओं के आतंकी रैंको में शामिल होने का कारण देश के भीतर और सीमा पार के गुर्गों द्वारा ऑनलाइन माध्यमों से कट्टरपंथ को बढ़ावा देना माना जा सकता है। आठ मई तक अपडेट आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018 में 187, 2019 में 121, 2020 में 181, 2021 में 142 और 2022 में 28 स्थानीय युवा आतंकी संगठनों का हिस्सा बने।
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दक्षिण कश्मीर अभी भी आतंकवाद का गढ़
अधिकारियों ने यह भी कहा कि दक्षिण कश्मीर के जिले अभी भी आतंकवाद के गढ़ बने हुए हैं क्योंकि अधिकांश स्थानीय रंगरूट इसी क्षेत्र से हैं। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान चलाने और कानून और व्यवस्था के कर्तव्यों का पालन करने के लिए 60 से अधिक बटालियनों को तैनात किया है। यह सुरक्षा ग्रिड का हिस्सा है जिसमें सीआरपीएफ, सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियां शामिल है।