दरबार मूव व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों ने जम्मू और श्रीनगर में अलग-अलग घर बना रखे हैं। बावजूद इसके वे सरकारी आवास का लाभ उठा रहे थे। ऐसे कई अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान हुई है, जो अपने रिहायशी आवास होने के बावजूद दरबार मूव में मिलने वाले सरकारी आवास पर कब्जा कर बैठे थे। कई ऐसे भी हैं जो नियमों को ताक पर रखकर आवास का लाभ ले रहे थे। ऐसे सभी कर्मचारियों से अब आवासीय आवंटन वापस लिए जा रहे हैं। नई व्यवस्था में खाली होने वाले आवासों को दरबार मूव के साथ संबंधित संभाग के दूरदराज जिलों से आने वाले कर्मियों को सरकारी आवास की सुविधा देने को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा ऐसे आवासों को अन्य कार्यों के लिए भी इस्तेमाल किया जाएगा।
सामान्य प्रशासनिक विभाग के आयुक्त सचिव मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि न्यूनतम स्तर पर कर्मचारियों से सरकारी आवास खाली करवाए जा रहे हैं। इनमें उनकर्मचारियों से आवास खाली करवाए जा रहे हैं जिन्हें इनकी सही जरूरत नहीं थी। दरबार मूव के साथ दोनों तरफ जरूरी स्टाफ रहता है। जिसमें जरूरी स्टाफ को आवास मुहैया करवाए जाएंगे और उन्हें दोनों जगह यह सुविधा दी जाएगी। दरबार मूव के दौरान देखा गया है कि कई सरकारी अधिकारी और कर्मचारी दूरदराज क्षेत्रों से संबंधित होते हैं और वे रोजाना अप डाउन नहीं कर सकते हैं।
ऐसे में संबंधित संभाग में उन्हें आवास मुहैया करवाए जाएंगे, ताकि वे बेहतर ढंग से अपने कामकाज को कर सकें। नई व्यवस्था में आवास आवंटन का गंभीरता से आकलन किया जा रहा है, जिसमें जरूरत के मुताबिक ही आवास मुहैया करवाए जाएंगे। पहले की व्यवस्था में कई योग्य अधिकारी और कर्मचारी इससे वंचित हो रहे थे।
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