उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को गुज्जर-बकरवाल और गद्दी-सिप्पी समुदाय के सदस्यों से बातचीत की। सिन्हा ने कहा कि सामाजिक समानता की प्रतिबद्धता के साथ हमने पिछले कुछ महीनों में सभी आदिवासी समुदायों को उचित अधिकार देने के लिए कई निर्णय लिए हैं। जम्मू-कश्मीर के इतिहास में पहली बार सरकार सोमवार को वन अधिकार अधिनियम के तहत लोगों को उनके अधिकारों को सौंपेगी। जनजातीय समुदायों के विकास के लिए एक व्यापक योजना को लागू करने के लिए सर्वेक्षण किया गया है।
केंद्र शासित प्रदेश सरकार ने चिकित्सा शिविरों, पशु यार्डों के प्रावधानों के अलावा मौसमी अस्थायी आबादी को समायोजित करने के लिए 28 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से आठ स्थानों पर आवास विकसित करने का निर्णय लिया है। जिसके तहत जम्मू, श्रीनगर और राजोरी में जनजातीय भवन बनेंगे। इतना ही नहीं आदिवासी युवाओं की स्थायी आजीविका के लिए हमने 16 करोड़ रुपये के 16 दुग्ध गांवों की स्थापना के अलावा 1500 मिनी भेड़ फार्म स्थापित करने का निर्णय लिया है।
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सिन्हा ने कहा कि समुदाय के 500 युवाओं को शुरू में विशेष कौशल विकास कार्यक्रमों से भी जोड़ा जाएगा। आदिवासी बच्चों को 30 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति दी गई है। इस वर्ष 42000 बच्चों को छात्रवृत्ति दी जाएगी। इसके साथ ही 1521 मौसमी स्कूल, प्रवासी मार्गों पर दो आवासीय स्कूल और कक्षा सात और कक्षा आठ के विद्यार्थियों को आठ हजार टैबलेट देने की योजना है।
कहा कि आदिवासी समुदायों को लघु वन उपज पर अधिकार मिल रहा है। ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के समन्वय से केंद्र शासित प्रदेश संग्रह, मूल्यवर्धन, पैकेजिंग और वितरण के लिए बुनियादी ढाँचा स्थापित करेगा। युवाओं और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए 15 आदिवासी एसएचजी का एक समूह स्थापित किया जाएगा।