छुट्टी के दौरान घर आए जवानों की सुरक्षा को लेकर सरकार और पुलिस के दावे बेअसर साबित होते दिखे रहे हैं। आतंकियों ने जिस तरीके से सेना के जवान का अपहरण के बाद हत्या की है उसके बाद तो यही लगता है कि पूरे देश की सुरक्षा करने वाले खुद अब सुरक्षित नहीं हैं।
ईद की छुट्टी में अपने घर पुंछ जा रहे औरंगजेब की आतंकियों ने बेरहमी से हत्या कर दी। ऐसा पहली दफा नहीं हुआ है कि कश्मीर में आतंकियों ने जवानों को निशाना बनाया हो। इसके पहले भी आतंकियों ने अपनी कायरता का परिचय देते हुए छुट्टी पर आने वाले जवानों को निशाना बनाया है।
साल 2017 में शोपियां के रहने वाले टेरिटोरियल आर्मी के जवान इरफान अहमद की आतंकियों ने गोली मार कर हत्या कर दी थी। आतंकियों ने रात को उनके घर से ही उनका अपहरण किया था। उसके बाद सुबह उनका शव पुलवामा से बरामद हुआ था।
वहीं कश्मीर में इससे पहले मई 2017 में भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट उमर फयाज की भी आतंकियों ने किडनैप करने के बाद हत्या कर दी थी। 22 वर्षीय उमर शोपियां में अपने कजन की शादी समारोह में भाग लेने आए थे।
उमर फयाज के लिए उनकी पहली छुट्टी ही जिंदगी की आखिरी छुट्टी बन गई थी। फयाज 129 वें बैच के कैडेट थे। वह 2 राजपूताना रायफल्स में तैनात थे।