भारतीय कला संगम की ओर से आयोजित लोक उत्सव में फुमिडया डांस की प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया। इस नृत्य की मान्यता है कि जब किसी परिवार में संतान होती है, तो इस खुशी को मनाने के लिए लोग अपने लोक देवता के स्थान पर यह नृत्य करते हैं।
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अतुल डोगरा, जो इस लोक कला के निदेशक हैं, उन्होंने बताया की बताया कि फुमिडया डांस न केवल आनंद का प्रतीक है, बल्कि यह हमारी संस्कृति और परंपराओं को भी दर्शाता है। उन्होंने इस नृत्य के महत्व को उजागर करते हुए कहा कि यह नृत्य समर्पण और आस्था का प्रतीक है, जो समुदाय के बीच एकता को बढ़ावा देता है।
उत्सव में आए दर्शकों ने फुमिडया डांस की रंगारंग प्रस्तुति का भरपूर आनंद लिया और कलाकारों की सराहना की। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने बताया कि इस प्रकार के आयोजनों से हमारी सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और बढ़ावा देने में मदद मिलती है। इस लोक उत्सव ने न केवल स्थानीय कलाकारों को एक मंच प्रदान किया, बल्कि दर्शकों को भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का काम किया। अतुल डोगरा ने सभी को इस प्रकार के आयोजनों में भाग लेने की अपील की ताकि हमारी लोक कला और संस्कृति जीवित रह सके।