जम्मू-कश्मीर में सरकार गठबंधन की प्रक्रिया को बड़ा झटका उस समय लगा, जब केंद्र सरकार द्वारा राज्य के लिए कोई विशेष आवंटन की घोषणा की घोषणा बजट में नहीं की गई।
इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि राज्य में सरकार गठन को लेकर और वक्त लग सकता है। इसके अलावा खबर यह भी है कि पीडीपी जमीनी स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करने में लग गई है।
सूत्रों के अनुसार राज्य के पूर्व वित्त मंत्री डा. हसीब द्राबू की केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से कुछ समय पूर्व हुई मुलाकात के बाद से पीडीपी उम्मीद लगाए बैठी थी कि केंद्रीय बजट में राज्य के लिए विशेष घोषणाएं की जाएंगी, जिससे उन्हें भाजपा के साथ गठबंधन को आगे बढ़ाने के लिए ठोस कारण मिलेगा, लेकिन ऐसा न होने पर पीडीपी के खेमे में भारी निराशा है।
केंद्रीय बजट पर पीडीपी के एक नेता ने कहा कि पार्टी को राज्य के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए प्रमुख घोषणाओं की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।
यह भी उम्मीद थी कि बजट के दौरान होने वाली घोषणाओं से राज्य में सरकार गठन के लिए अच्छा माहौल बनेगा। लेकिन ऐसा न होने से पार्टी कैडर में काफी निराशा है। इससे यह लगता है कि सरकार गठन में अभी कुछ समय और लग सकता है।
सरकार गठन पर अभी भी सस्पेंस बरकरार
घाटी के एक अर्थशास्त्री के अनुसार भले ही दोनों दल के कुछ वरिष्ठ नेता सरकार गठन के लिए बातचीत में लगे हुए थे, लेकिन इस सबके बावजूद पीडीपी को बजट की घोषणा में मुख्य वित्तीय घोषणाओं की उम्मीद थी, क्योंकि वर्ष 2014 में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद से राज्य में सभी क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था में गिरावट देखने को मिला था।
पीडीपी के सूत्रों के अनुसार पीडीपी सरकार गठन में समय इसलिए ले रही थी कि उन्हें केंद्र से उम्मीद थी कुछ अहम घोषणाओं की। अब यह संभावनाएं भी जताई जा रही है कि पीडीपी शायद भाजपा से गठबंधन तोड़ ले, क्योंकि उनके पास गठबंधन को आगे बढ़ाने को लेकर जनता को दिखाने के लिए ठोस कारण नहीं।
साथ ही जो छवि वह गवां चुकी है भाजपा का साथ देकर, शायद उसे वापस पाने के लिए वह ऐसा करे। इस बीच खबर यह भी है कि ‘मेंबरशिप ड्राइव’ की आड़ में पीडीपी ने दक्षिणी कश्मीर में पार्टी का प्रचार शुरू किया हुआ है ताकि वह चुनावों की स्थिति में जमीनी स्तर पर मजबूत रहे।
गौरतलब है कि मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन के बाद से ही सरकार गठबंधन को लेकर बना सस्पेंस खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। दोनों दल गठबंधन के कायम होने का दावा जरूर कर रहे, लेकिन कोई भी कुछ साफ तौर पर बयां नहीं कर रहा।