कश्मीर में आई बाढ़ में अपने देश के नागरिकों की रक्षा के लिए जान की बाजी लगाने वाली भारतीय सेना पडोसियों का भी पूरा ख्याल रख रही है।
पहले पाकिस्तान से कश्मीर आए सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को सेना ने पूरी हिफाजत से बाहर निकाला और अब कश्मीर में फंसे पीओके के नागरिकों को भी बाढ़ से सुरक्षित निकाल कर इंसानियत की मिसाल कायम की है। यही कारण है कि बाढ़ से सुरक्षित बचाए गए पीओके के नागरिक सेना के जज्बे के कायल हो गए हैं और उसके गुण गाते नहीं थक रहे।
अभी कुछ दिन पहले ही सेना द्वारा पाकिस्तान के सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को बाढ़ ग्रस्त इलाकों से सुरक्षित बाहर निकालने पर काफी तारीफ हुई थी। भारत आए पाक प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय सेना के जज्बे और रवैये की जी खोलकर तारीफ की थी।
पीओके के 68 लोग फंसे थे कश्मीर की बाढ़ में
इसके बाद से ही सेना लगातार कश्मीर में बचाव अभियान में जुटी हुई है। इसी बीच सेना को जानकारी मिली की पीओके (पाक अधिकृत कश्मीर) के कुछ नागरिक भी कश्मीर में विभिन्न इलाकों में फंसे हुए हैं।
ये वो लोग थे जो व्यापार या अन्य कामों के सिलसिले में चक्कां दा बाग से होते बस द्वारा भारत आते रहे हैं। लेकिन कुछ दिन पहले आई प्राकृतिक आपदा आने के कारण यहीं फंस गए।
इसके बाद सेना ने इंसानियन और आपसी सौहार्द्र की शानदार मिसाल पेश करते हुए 68 नागरिकों को पूरी हिफाजत से बाहर निकाला। सेना द्वारा रेसक्यू किए गए पीओके के मीरपुर निवासी असलम शेख ने कहा कि वो कुछ दिन पहले ही यहां आए थे और बाढ़ के कारण कश्मीर में फंसे हुए थे।
कहा सेनाओं ने सीमाओं से ऊपर उठकर की हिफाजत
उन्हें उम्मीद नहीं थी कि वो दो तीन महीने से पहले यहां से निकल भी पाएंगे लेकिन सेना ने पूरी तत्परता से कार्य करते हुए उन्हें महफूज निकाल लिया। वहीं पीओके के कोटली निवासी उमर फारुख भारतीय सेना की तारीफ करते करते भावुक हो गए।
कहा सेना ने सीमाओं से ऊपर उठकर हमारी मदद की। वहीं पीओके के नागरिक मोहम्मद अफसर भी भारतीय सेना की तारीफ कसीदे गढ़ते नजर आए। भारतीय जवानों द्वारा बचाए गए सभी 68 नागरिकों को पुंछ के चक्कां दा बाग से बस में बैठाकर पाकिस्तान के रावलकोट के लिए रवाना किया गया।