कश्मीरी युवाओं को सही राह दिखाने और उन्हें सुधरने का मौका देने के उद्देश्य से सीआरपीएफ श्रीनगर सेक्टर ने इल्म-ए-रोजगार कार्यक्रम शुरू किया है। इसके तहत युवाओं को अर्धसैनिक बलों में शामिल होने के लिए तैयार करेंगे।
आईजी श्रीनगर सेक्टर चारु सिन्हा ने कहा कि किसी भी क्षेत्र में टकराव से निपटने के लिए ऑपरेशन ही काफी नहीं होते। कई रणनीतियों का इस्तेमाल करना पड़ता है। यह कार्यक्रम भी उसी रणनीति का हिस्सा है, ताकि युवाओं को गलत राह पर जाने से रोका जा सके। इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए कश्मीर के लगभग सभी जिलों से युवा पहुंचे थे।
चारु सिन्हा ने कहा कि इल्म-ए-रोजगार का मूल मकसद कश्मीरी युवाओं को अर्धसैनिक बलों में भर्ती प्रक्रिया के लिए तैयारी कराना है। इसमें शारीरिक और लिखित परीक्षा की तैयारी होती है। इसके लिए ऑनलाइन कक्षाएं शुरू हो गई हैं, और किताबें भी बांट दी गई हैं। साथ ही पांच-पांच के समूहों में इन्हें बांटा गया है, ताकि वे एक साथ सही से पढ़ें।
और अगर कहीं दिक्कत आए तो वे ऑनलाइन कक्षाओं में उसे दूर कर सकें। अभी करीब चार से पांच महीने का समय है। कोशिश है कि इनको बहुत अच्छे से तैयारी कराई जाए, ताकि जब परीक्षाएं हों, तो वे अच्छे से तैयार हों। इसमें बांदीपोरा, पुलवामा, अनंतनाग, आदि जगहों से युवा आए हैं। खुशी होगी अगर और युवा आगे आएंगे।
आईजी ने कहा कि जो रोजगार के अवसर देश भर के युवाओं के पास हैं, उतने अवसर यहां के युवाओं को नहीं मिल पाते। इसलिए यह एक अच्छा अवसर है। एक उम्र तक युवा भटकने की कगार पर रहते हैं। अगर उन्हें सही समय पर सही दिशा में ले जाया जाए तो वे अपनी जिंदगी बना सकते हैं। वहीं, पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों को ऑपरेशनों के दौरान मिली सफलता को लेकर चारु सिन्हा ने कहा कि काफी सफल ऑपरेशन रहे हैं। चाहे वे आतंकवाद हो या नक्सलवाद, उससे निपटने के लिए कई रणनीतियां बनानी पड़ती हैं।
केवल ऑपरेशनों से सफलता नहीं मिलती। और सबसे जरूरी होता है कि जिन युवाओं को गुमराह किया जाता है, क्या उन्हें जिंदगी संवारने के मौका दे सकते हैं या नहीं? यह कार्यक्रम भी उसी रणनीति का एक हिस्सा है। इस बीच पाकिस्तान की ओर से ड्रोन व अन्य तकनीकों के इस्तेमाल किए जाने को लेकर उन्होंने कहा कि चाहे कोई भी तकनीक वह इस्तेमाल करे, उसका जवाब निकाल रहे हैं, और आगे भी निकाल लेंगे।