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कठुआ के जिला अस्पताल की लैब में भीषण आग

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कठुआ जिला अस्पताल के दो कमरों में शनिवार की शाम आग लगने से अफरातफरी मच गई। लोगों की चीख-पुकार के बाद अस्पताल प्रशासन ने दमकल विभाग और पुलिस को सूचित किया। करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पाया। शाम के समय हुए इस हादसे से हुए नुकसान का आकलन अभी नहीं किया जा सका है।
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रविवार तक नुकसान की रिपोर्ट आने की संभावना है। हुआ यूं कि, जिला अस्पताल के अधीक्षक मनोज भगत ने बताया कि शाम को टेकनीशियन ने बताया कि ब्लड बैंक के पास वाली लैब से धुआं निकल रहा है। इसके बाद जब कमरा खोलने की कोशिश की गई तो कमरे का दरवाजा काफी गरम हो चुका था। जिसके बाद फौरन दमकल विभाग को सूचित किया गया।

शॉर्ट सर्किट से लगी लैब में आग

दमकल विभाग के कर्मचारियों ने मौके पर आकर आग बुझाने के लिए अभियान शुरू किया जो करीब एक घंटे तक चला। जिसके बाद लैब और कमरे में जाकर स्थिति का जायजा लिया गया। उन्होंने बताया कि आग का कारण शार्ट सर्किट है।

दोपहर दो बजे लैब बंद हो जाती है। जिसके बाद केवल ब्लक बैंक ही खुला रहता है। लैब में आग का कारण शार्ट सर्किट ही है, लेकिन यह बिजली के बोर्ड में हुआ है या फिर एसी में इसकी अभी पुष्टि नहीं हो पाई है।

इसके साथ ही नुकसान का आकलन करने में भी टीम जुटी है।

लैब के शीशे तोड़कर बुझाई आग

जिला अस्पताल की लैब में आग को बुझाने का अभियान आसान नहीं था। दूसरी मंजिल में स्थित लैब तक पहुंचे के सारे रास्ते बंद हो चुके थे। स्टेशन मास्टर टीएस जसरोटिया ने बताया कि करीब छह बजे लगी आग को बुझाने के लिए सवा छह बजे दमकल विभाग के कर्मचारी पहुंचे।

सबसे पहले उन्होंने सीढ़ी के सहारे शीशों से अंदर की आग को देखा। इसके बाद नीचे से पत्थर मारकर शीशे तोड़कर लैब के अंदर गए। जिसके बाद लैब की आग पर काबू पाया जा सका। पौने सात बजे कर्मचारियों ने दूसरे कमरे में एंट्री की और वहां की आग पर काबू पाने के बाद प्रशासन को अंदर का आकलन करने के लिए भेजा गया।
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अस्पताल में नहीं हैं आग से निपटने के इंतजाम

जिला अस्पताल में आग की यह पहली घटना नहीं है, लेकिन बावजूद इसके जिला अस्पताल में आग से निपटने के लिए बचाव तंत्र को अब तक स्थापित नहीं किया गया है। सबसे बड़ी खामी कि आग लगने पर कोई भी आसानी से अस्पताल से बाहर नहीं आ सकता है।

आग बुझाने वाले यंत्र भी वर्किगिं हालत में नहीं हैं। उन्हें पिछली बार कब रिफिल किया गया, इसके बारे में अस्पताल के लोगों को कोई जानकारी नहीं है। दमकल विभाग के अभियान से पूर्व भी यह देखा गया कि लैब की आग बुझाने के लिए जिला अस्पताल प्रशासन के हाथ में कुछ नहीं था।

यदि ऐसा नहीं होता, तो कम से कम लैब के दरवाजे को ठंडा तो किया ही जा सकता था और नुकसान को भी कम किया जा सकता था।
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