जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के उच्च न्यायालय ने कहा है कि रक्षा से जुड़े कामों में बाधा पहुंचाने वाली किसी नागरिक गतिविधि को अनुमित नहीं दी जा सकती। अदालत ने श्रीनगर हवाई अड्डे के आठ किलोमीटर के दायरे में चलने वाले ईंट-भट्ठों पर तत्काल रोक के आदेश जारी किए। श्रीनगर हवाई अड्डे के उन्नयन कार्य की निगरानी की मांग करने वाली याचिका पर मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल और न्यायमूर्ति संजय धर की खंडपीठ ने कहा कि 2016 में दाखिल जनहित याचिका को बंद किया जाता है।
याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पाया कि श्रीनगर हवाई अड्डा नागरिक हवाई अड्डा नहीं है। यह रक्षा विभाग का है इसलिए उसका विकास सुरक्षा बलों की जरूरतों पर निर्भर करता है। यहां वायु सेना द्वारा अनुमोदित सभी आवश्यक प्रणालियों को स्थापित किया गया है। इसलिए हवाई अड्डे पर नागरिक गतिविधि को हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
हवाई अड्डे के आसपास स्थित ईंट -भट्टों से निकलने वाले धुएं के कारण होने वाली रुकावट के संबंध में अदालत ने निर्देश दिया कि इसे संबंधित अथॉरिटी अपने जरूरतों और नियमों के अनुसार देखे। मंडलायुक्त की ओर से बताया गया कि वायुसेना ने ईंट-भट्ठों से निकलने वाले धुएं का मुद्दा उठाया था, जिसके बाद रनवे के मध्य से आठ किलोमीटर के दायरे में ईंट भट्ठों को बंद करने को कहा गया है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि आठ किलोमीटर के दायरे में सभी ईंट भट्ठों को कहीं और शिफ्ट कर तत्काल बंद किया जाए।
क्षमता के अनुसार लगाए गए हैं उपकरण
अदालत के निर्देशों की अनुपालना में वायु सेना ने एक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी जिसमें कहा गया है कि उसने श्रीनगर हवाई अड्डे के लिए लैंडिंग सिस्टम जैसे नौवहन उपकरण स्थापित किए हैं। ज्यादातर उपकरण और व्यवस्थाएं हवाई अड्डे के स्तर के अनुसार स्थापित कर दिए गए हैं। केवल ईंट भट्ठों से निकलने वाले धुएं की वजह से लैंडिंग सिस्टम पूरी तरह से काम नहीं कर पा रहे हैं।