जम्मू। जम्मू-कश्मीर में युवाओं के साथ किशोर भी तेजी से हेरोइन के नशे के जाल में फंसते जा रहे हैं। अस्पतालों में 18 वर्ष आयु वर्ग से ऊपर नशे के मामले रिपोर्ट हो रहे हैं, लेकिन उनके चिकित्सा इतिहास में पाया गया है कि अधिकांश में स्कूली और कॉलेज छात्र गलत आदतों में फंसकर पहले ही नशे का शिकार हो चुके थे। अस्पतालों में वही मामले पहुंच रहे हैं जो गंभीर हालत में होते हैं, जबकि एक बड़ी संख्या में ऐसे मामले आधिकारिक तौर पर दर्ज ही नहीं हो रहे हैं। साइकाइटरी अस्पताल के ओपियड सब्स्ट्यिूट थैरेपी (ओएसटी) केंद्र में अब तक 900 मरीज पंजीकृत हो चुके हैं, जिनमें अधिकांश की आयु 18 से 25 वर्ष के बीच है। इनमें कुछ युवतियां भी नशे का शिकार हैं।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हाल ही में हुई नार्को समन्वय केंद्र की राज्य स्तरीय समिति की बैठक में बताया गया कि जम्मू-कश्मीर के 6 लाख लोग नशे का शिकार हो चुके हैं। इसमें 90 फीसदी युवा 17 से 33 साल के हैं और कुल आबादी में 4.6 प्रतिशत नशे से प्रभावित हैं, जबकि प्रदेश में अनाधिकारिक तौर पर यह आंकड़ा बढ़ा है। ओएसटी केंद्र की प्रभारी डॉ. चारू बाली ने बताया कि केंद्र में रिपोर्ट हो रहे कुल नशे के मामलों में 80-90 फीसदी हेरोइन के हैं। इनमें अधिकांश 18-30 आयु वर्ग के युवा प्रभावित हैं, लेकिन उनके चिकित्सा इतिहास से पता चलता है कि वे पहले ही नशे की चपेट में आ चुके थे। केंद्र में प्रतिदिन करीब 500 मरीज दवाई लेने पहुंच रहे हैं, जिन्हें वैकल्पिक (सब्सिट्यूट) थैरेपी में डोज के मुताबिक ब्यूपरीनारफीन नामक दवा दी जाती है। केंद्र में प्रतिदिन 1-2 नए मामले रिपोर्ट हो रहे हैं।
सामूहिक निडिल से एचआईवी का खतरा बढ़ा
हेरोइन की लत को पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में किशोर और युवा सामूहिक निडिल के प्रयोग से शरीर में नशा लेते हैं, जिससे उनमें एचआईवी, हैपेटाइटिस सहित अन्य संक्रमित बीमारियों का खतरा बढ़ा है। कई ऐसे मामले पकड़ में भी आए हैं। ओएसटी केंद्र पहुंचने वाले पीड़ितों के एचआईवी टेस्ट कराए जा रहे हैं।
4 हजार से शुरू होता है नशे का शौक
हेरोइन के महंगे नशे के शौक के लिए शुरुआत में 3-4 हजार रुपये में डोज ली जाती है, लेकिन धीरे-धीरे डोज बढ़ने पर इसकी कीमत मोटी होती चली जाती है। हेरोइन के नशे के पीड़ितों में फेफड़ों की इन्फेक्शन रहती है।
केस 1
बनतालाब निवासी 12वीं के एक छात्र को ओएसटी केंद्र साइकाइटरी अस्पताल में कुछ माह पहले गंभीर हालत में लाया गया था। जांच में पता चला कि उसे हेरोइन की लत लग गई है। गलत माहौल में पड़कर वह नशे का आदी हो चुका था और रोजाना न मिलने पर उसकी सेहत बिगड़ती चली गई। अब उसे सब्स्टीट्यूट थैरेपी से उपचार दिया जा रहा है। छात्र के मुताबिक उसे कुछ असामाजिक तत्वों ने हेरोइन की लत लगाई और धीरे धीरे वह उसकी गिरफ्त में फंस गया।
केस 2
अखनूर निवासी 11वीं कक्षा के छात्र को कुछ माह पहले शरीर में तेज दर्द होने की शिकायत हुई। शरीर लगातार टूटता रहा और कमजोरी महसूस हुई। नाक और मुंह से पानी चलता रहता था। हालत बिगड़ने पर जब अस्पताल लाया तो पता चला वह हेरोइन का शिकार हो गया है और रोजाना डोज न मिलने पर उसकी हालत खराब हो रही है। अब उसे इलाज दिया जा रहा है।
धीरे धीरे बढ़ेगी इलाज करने की क्षमता
इस समय जम्मू, सांबा और उधमपुर में पुलिस के नशामुक्ति केंद्र हैं। इनकी क्षमता धीरे-धीरे बढ़ाई जाएगी। आने वाले समय में हर जिले में नशा मुक्ति केंद्र बनाया जाएगा। रही बात नशा तस्करी करने वालों की तो हमारी कोशिश रहती है कि हेरोइन समेत अन्य नशा तस्करों पर कड़ी कार्रवाई हो। युवाओं और बच्चों को जागरूक करने के लिए स्कूल कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम करवाए जाएंगे।
-मुकेश सिंह, एडीजीपी, जम्मू