पीपुल्स अलायंस फॉर गुपकार डिक्लेरेशन (पीएजीडी) को गठबंधन बनने के बाद दूसरा झटका लगा है। इसमें शामिल जम्मू एंड कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट (जेकेपीएम) ने रविवार को गठबंधन के साथ अपना नाता तोड़ लिया है। पार्टी अध्यक्ष डॉ. मुस्तफा खान ने कहा कि गठबंधन के पास कोई स्पष्ट रणनीति नहीं है। नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी चाहते हैं कि जम्मू-कश्मीर में उनका पारंपरिक पारिवारिक शासन कायम रहे। इससे पहले डीडीसी चुनाव के बाद सज्जाद लोन के नेतृत्व वाली पीपुल्स कांफ्रेंस ने भी नाता तोड़ लिया था।
डॉ. मुस्तफा ने कहा, हमने पीएजीडी के लगभग हर एक सदस्य से संपर्क किया और एक स्पष्ट रोड मैप की मांग की, जो अब तक हमें कभी नहीं मिला। गठबंधन का गठन सामूहिक रूप से छीनी गई पहचान की बहाली के लिए किया गया था। जम्मू-कश्मीर और युवाओं की आकांक्षाओं और जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए किया गया था, लेकिन दुर्भाग्य से पीएजीडी के पास कोई स्पष्ट रोड मैप नहीं है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि अनुच्छेद 370 और 35ए को निरस्त कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में पीएजीडी का कोई वकील नहीं था। हम नहीं चाहते कि जेकेपीएम भविष्य में जम्मू-कश्मीर के लोगों के खिलाफ किसी राजनीतिक साजिश का हिस्सा बने, इसलिए जेकेपीएम ने पीएजीडी छोड़ने का फैसला किया है।
नई रणनीति की घोषणा शीघ्र
डॉ. मुस्तफा ने कहा कि ऐसे कई उदाहरण हैं जब दोनों दलों (पीडीपी और नेकां) ने पहले भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ा और बाद में सत्ता में रहते हुए उनके साथ सहयोगी बने रहे। उन्होंने कहा, यह दिखाता है कि उन्होंने अतीत में स्पष्ट रुख नहीं रखा है और यह अब भी अस्पष्ट है। कहा कि पार्टी की भविष्य की रणनीति की घोषणा जल्द ही उचित समय पर की जाएगी।