जिला उपायुक्त कार्यालय में जम्मू कश्मीर के अलावा बाहरी राज्यों के लोग भी गन लाइसेंस के डिजिटाइजेशन करवाने के लिए पहुंच रहे हैं, लेकिन उन सबके लिए एनओसी देना बहुत अनिवार्य है।
इसके बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। रियासत जम्मू एंड कश्मीर में डेढ़ लाख लोगों के पास गन लाइसेंस है। डिजिटाइजेशन का कार्य पूरे राज्य में किया जा रहा है।
बाकायदा, इसके लिए तहसील कार्यालयों में सरकारी अमले को लगाया गया है। यहां डोडा, पुंछ, राजोरी, कश्मीर संभाग के अलावा गुजरात और छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों से भी लोग पहुंच रहे हैं।
इन लोगों के रिकार्ड का डिजिटाइजेशन करना काफी मुश्किल हो रहा है, क्योंकि बिना एनओसी इन्हें आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
अधिकतर मामलों में डीसी आफिस से ही संबंधित व्यक्ति की एनओसी उसके संबंधित जिला और तहसील से मंगवाई जा रही है या कुछ मामलों में लोग खुद ही अपने प्रयासों से एनओसी लाकर दे रहे हैं।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि विभाग के लिए इस बात को पुख्ता करने में कई अड़चनों से गुजरना पड़ रहा है कि क्या गन लाइसेंस धारक के लाइसेंस का सरकारी विभाग में रिकार्ड है या नहीं।
ताकि यह स्पष्ट हो सके कि लाइसेंस वाजिब है या नहीं। इन सब बातों को सुनिश्चित करने काफी वक्त लग रहा और खासी परेशानियां उठानी पड़ रही है हालांकि कुछ मामलों में सीबीआई को भी लिखा गया है।