फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ground Zero : चार रात तक गोलाबारी में घर तबाह, लोग बोले... हमारे तो सपने धमाकों में उजड़ गए, घर कैसे लौटें

Mon, 12 May 2025 04:36 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, कुपवाड़ा/पुंछ/उड़ी/राजोरी

सार

पाकिस्तान की इस हरकत से बॉर्डर इलाकों में कई घर तबाह हो गए। खौफ के साये में जी रहे वहां के लोगों का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर से बौखलाए पाकिस्तान का कोई भरोसा नहीं है। पता नहीं वह फिर कब हमला कर दे। ग्राउंड जीरो से अमर उजाला के रिपोर्टर बता रहे संघर्षविराम की अगली सुबह के हालात...
विज्ञापन
बारामुला : पाकिस्तान की ओर से दो दिन पहले तक लगातार की गई गोलाबारी से बॉर्डर के आसपास बसे लोग दहशत में हैं। वे अपने घर छोड़ सुरिक्षत ठिकानों पर शरण लिए हुए हैं। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

संघर्षविराम की घोषणा के बाद भी पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आया और कई घंटों तक गोलाबारी करता रहा। पाकिस्तान की इस हरकत से बॉर्डर इलाकों में कई घर तबाह हो गए। खौफ के साये में जी रहे वहां के लोगों का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर से बौखलाए पाकिस्तान का कोई भरोसा नहीं है। पता नहीं वह फिर कब हमला कर दे। ग्राउंड जीरो से अमर उजाला के रिपोर्टर बता रहे संघर्षविराम की अगली सुबह के हालात...

विज्ञापन


सुरक्षित ठिकानों पर लोगों ने ली है शरण
ऑपरेशन सिंदूर से बुरी तरह बौखलाए पाकिस्तान ने तंगधार में मंगलवार रात से ही कहर ढा रखा था। चार रोज तक हर रात भारी गोलाबारी की गई। इन चार दिनों में त्रिबुनि, शमसपोरा, बागबेला, दिलदार, भटपोरा, नवगाबरा गांव में 100 से ज्यादा घर तबाह हो गए। करीब 50 वाहन क्षतिग्रस्त हुए हैं। हालांकि, अभी सरकार की ओर से आकलन शुरू नहीं हुआ है, लेकिन लोगों के अनुसार यहां काफी नुकसान हुआ है।

त्रिबुनि में गोलाबारी से कई मकानों में आग लग गई थी, जिससे वे पूरी तरह जल गए हैं। हमलों में कुछ लोग घायल भी हुए थे। यहां से 90 फीसदी लोग सुरक्षित ठिकानों पर शरण लिए हुए हैं। बाकी के लोग दिन-रात बंकरों में काट रहे थे। लोग अभी यहां वापस लौटने से घबरा रहे हैं। उनका कहना है कि बौखलाए पाकिस्तान का कोई भरोसा नहीं है। पता नहीं कब फिर से हमला कर दे। इस संघर्ष में उनका मकान, दुकानें और वाहन तक नष्ट हो गए हैं। मवेशी भी मारे गए। पाकिस्तान को ऐसे ही छोड़ देना लोगों को गवारा नहीं है। 
विज्ञापन


कुपवाड़ा के शहरी इलाके में शरण लिए एजाज बट कहते हैं, सब कुछ खोने के बाद अब घर कैसे लौटें। घर बनाना एक सपने की तरह होता है। मेरा तो सपना ही धमाकों के साथ टूट गया। अब दोबारा घर बनाना बहुत मुश्किल है। सरकार अगर मदद करे तो कुछ राहत अवश्य मिल सकती है।

कायरों ने हमें बर्बाद कर दिया
अफरोज बताते हैं, कई वर्षों से हम यहां रह रहे हैं। नागरिकों पर किए गए पाकिस्तान के कायराना हमलों से हमारा आशियाना तबाह हो गया। बड़ी मेहनत से घर बनाया था। कायरों ने हमें बर्बाद कर दिया। पाकिस्तान का कोई भरोसा नहीं है। पाकिस्तान को ढंग से सबक सिखाना जरूरी था।
-अजीम यूसुफ, कुपवाड़ा के तंगधार से

पाकिस्तान की नीयत पर लोगों को संदेह

भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम तो हुआ, लेकिन गोलाबारी पीड़ितों को उम्र भर के लिए जख्म दे गया। पुंछ इस गोलाबारी से काफी प्रभावित हुआ। यहां पांच दिनों तक जमकर गोलाबारी हुई।

ऑपरेशन सिंदूर से पहले भी पाकिस्तानी सेना रात में गोलीबारी कर इस इलाके को निशाना बनाती रही। ऐसे में वह संघर्ष विराम का पालन करेगा, इसे लेकर लोगों के मन में संदेह है। रविवार को भी यहां का माहौल तनावपूर्ण रहा। हालांकि, सुबह से किसी तरह की गोलाबारी की खबर सामने नहीं आई, मगर लोग एहतियातन सुरक्षित ठिकानों पर ही बने रहे। वे अभी घर लौटने को तैयार नहीं है। 

लोगों का कहना है कि अभी कुछ दिन और इंतजार कर पाकिस्तान की नीयत को परखेंगे। दरअसल, पाकिस्तानी सेना ने इस बार नियंत्रण रेखा पर बसे गांव को निशाना बनाया। पुंछ नगर के साथ नियंत्रण रेखा से दूर सुरक्षित माने जाने वाले पुंछ तहसील के बैंच, खनेतर और कलाई पर भी गोले बरसाए हैं।

नियंत्रण रेखा से 35-40 किलोमीटर दूर सुरनकोट तहसील मुख्यालय पर भी ड्रोन से हमला किया। पांच दिन तक चली गोलाबारी में जिले में 16 लोगों की मौत हो गई और 50 से अधिक घायल हो गए।

पाकिस्तानी गोलाबारी में जिले में 100 से अधिक मवेशी घायल हो गए और दर्जनों मवेशियों की मौत हो गई। 100 अधिक दुकानें, मकान और दर्जनों वाहन तबाह हो गए। जिले में करीब आधा दर्जन धार्मिक स्थलों को भी पाकिस्तानी सेना ने निशाना बनाकर उन्हें क्षति पहुंचाई है। 
-मुनीश शर्मा, पुंछ से
 

फिजां में शांति, घर लौटने लगे लोग

ऑपरेशन सिंदूर से बौखलाए पाकिस्तान ने उड़ी सेक्टर में रिहायशी इलाकों में काफी नुकसान पहुंचाया। सीजफायर के बाद उड़ी की फिजां में शांति है। लोग धीरे-धीरे घरों की ओर लौट रहे हैं। पाकिस्तान ने उड़ी सेक्टर में नियंत्रण रेखा के करीब स्थित गावों पर आर्टिलरी फायरिंग की थी।

इसके बाद लोगों ने सुरक्षित स्थानों पर शरण ली। सिर्फ उड़ी में ही 15 ऐसे गांव रहे, जो पाकिस्तानी शेलिंग से प्रभावित हुए। इनमें गिंगल, चुरुंडा, सलामबाद, दछना, सिलिकूट, लगामा, लच्छीपोरा, गरकोट, थजल, मुथल, तोरना, रुस्तम, कमलकोट, उरूसा और बालाकोट शामिल हैं। गोलाबारी में सबसे ज्यादा नुकसान घरों व अन्य बुनियादी ढांचों को हुआ है। 

उड़ी के रहने वाले मुदस्सिर अहमद बताते हैं, चार दिनों के बाद यहां की फिजां में थोड़ी शांति देखने को मिली है। दुकानें खुलने लगी हैं। लोगों में अब भी डर तो है, जो आहिस्ता-आहिस्ता दूर होगा। बाजार से पहले स्थित गावों की बात करें तो गिंगल, मोहरा, लगामा ऐसे गांव है, जहां करीब 40 मकान और 20-25 गाड़ियां तबाह हो गई हैं।

एक महिला की मौत भी हुई है, जबकि 10-15 लोग घायल हुए हैं। सलामाबाद के रहने वाले चरणजीत सिंह बताते हैं कि काफी दिनों के बाद आज धमाके नहीं सुनाई दिए। सीजफायर से थोड़ी राहत मिली। बेचैनी इस बात की थी कि पाकिस्तान इसका पालन करेगा या नहीं। शुक्र है, रात में गोलाबारी नहीं हुई। एक बार फिर अमन की शुरुआत हुई है। आशा करते हैं कि यह ऐसे ही बरकरार रहे। 
-अमृतपाल सिंह बाली, उड़ी से
 
विज्ञापन

नहीं खुले बाजार, अब भी दहशत का माहौल बरकरार

पाकिस्तानी गोलाबारी थम गई है। फिजा में धमाकों की गूंज भले ही थम गई हो, पर दिलों में अब भी शोर है। पाकिस्तान की नीयत पर सवाल है। भरोसे का संकट है। कुछ ऐसा ही है राजोरी का माहौल, जिसे गोलाबारी से काफी नुकसान पहुंचा है। रविवार को सूरज निकला तो लोगों में पाकिस्तान की नापाक हरकतों को लेकर गुस्सा दिखा। दोनों देशों के बीच सीजफायर की घोषणा के बाद भी शनिवार की रात हुई गोलाबारी ने राजोरी के लोगों की शांति की उम्मीदें धूमिल कर दीं। इसी कारण रविवार को बाजार नहीं खुले और लोगों में डर का माहौल बरकरार रहा। हर ओर सन्नाटा पसरा रहा। इतना ही नहीं, राजोरी से निकलकर दूसरे क्षेत्रों में जा चुके राजोरीवासी अब भी अपने घरों में नहीं लौटे हैं। उन्हें अब भी पाकिस्तान पर भरोसा नहीं है।

स्थानीय निवासी राजेश गुप्ता ने कहा कि शनिवार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत-पाकिस्तान के सीजफायर के बाद भी पाकिस्तान कई घंटे तक भारी गोलाबारी करता रहा तो ऐसे में उसका क्या भरोसा है कि वो दोबारा से गोलाबारी नहीं करेगा। एक अन्य निवासी ठाकुर कमल सिंह ने बताया कि इससे पहले भी राजोरी पाकिस्तान के निशाने पर रहा है, और पाकिस्तान के कबायली पहले भी राजोरी पर एक बार छह माह तक कब्जा कर चुके हैं। ऐसे में पाकिस्तान पर भरोसा करना संभव नहीं है, क्योंकि पाकिस्तान न कभी सच बोलता है और न कभी सच पर चलता है। राजिंदर गुप्ता ने कहा कि सुबह से शांति बनी हुई है, लेकिन पाकिस्तान फिर कब से फायरिंग शुरू कर दे, इसका कोई भरोसा नहीं किया जा सकता।



बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान
पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी ने राजोरी में नागरिक बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिसमें एक वरिष्ठ अधिकारी समेत तीन लोगों की जान भी चली गई, जबकि 20 लोग घायल हुए हैं। इन सभी का उपचार अब भी जीएमसी राजोरी में जारी है। जिला प्रशासन के अनुसार, पाकिस्तानी गोलाबारी से नुकसान का पूरा आकलन अभी नहीं हो पाया है, लेकिन अभी तक की जानकारी के अनुसार राजोरी के खेवरा क्षेत्र में तीन मकानों और दो दुकानों को नुकसान पहुंचा है, जबकि ठंडीकस्सी, मुबारखपुरा, इरा दे खेत्र, पलूलिया, मनकोट, टंडवाल आदि गांवों में करीब 40 घरों और 10 से 14 दुकाने क्षतिग्रस्त हुई हैं। नुकसान का पूरा आकलन करने के लिए प्रशासन विशेष टीमें गठित कर जल्द प्रभावित क्षेत्रों में भेजेगा।
-रवि वर्मा, राजोरी से
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें