60 हजार करोड़ की महत्वाकांक्षी दिल्ली-कटड़ा एक्सप्रेस-वे परियोजना में जम्मू-कश्मीर की एलाइनमेंट सर्वे के बाद दूसरा चरण शुरू हो गया है। इसमें कीडिय़ां गंडियाल से कटरा तक ड्रोन से जियोटेक्निकल सर्वे का आगाज कर दिया गया है।
ड्रोन सर्वे से जहां एलाइनमेंट और जद में आने वाले ढांचों की जानकारी मिल सकेगी वहीं जियोटेक्निकल सर्वे से जिन इलाकों से यह एक्सप्रेस वे गुजरेगा उसकी मिट्टी का स्ट्राटा यानी की सतहों को भी जाना जा सकेगा। इससे इंडियन रोड कांग्रेस की गाइडलाइन के अनुसार पुलों को मिट्टी की सतहों और क्षमता अनुसार डिजाइन करवाया जाएगा।
जम्मू-कश्मीर में एक्सप्रेस-वे पठानकोट से प्रदेश में कीडिय़ां गंडियाल पंचायत से दाखिल होगा। खास बात है कि प्रदेश में कटड़ा तक एक्सप्रेस-वे किसी भी प्रमुख शहर और कस्बे से होकर नहीं गुजरेगा। जम्मू-कश्मीर में 105 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेस-वे पठानकोट से कीडिय़ां गंडियाल के बाद कठुआ शहर को बाईपास कर सकताचक के पास जम्मू-पठानकोट नेशनल हाईवे से मिलेगा।
इसके बाद चड़वाल और सांबा को बाईपास करते हुए यह एक्सप्रेस-वे विजयपुर, बिश्नाह, आरएस पुरा और फिर अखनूर रोड से दोमेल में जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे से मिलेगा। इस तरह जम्मू शहर भी एक्सप्रेस-वे से पूरी तरह से बाईपास हो जाएगा। एक्सप्रेस-वे की कुल लंबाई 575 किलोमीटर है। हरियाणा में 170, पंजाब में 300 और जम्मू-कश्मीर में इस एक्सप्रेस-वे की लंबाई 105 किलोमीटर होगी। दिल्ली-कटरा एक्सप्रेस वे का काम वर्ष 2023 तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके पूरा होने के बाद जम्मू से दिल्ली का सफर मात्र छह घंटे में पूरा हो जाएगा, जो वर्तमान में लगने वाले समय से आधा है।
अगले वर्ष से शुरू हो जाएगा काम
नेशनल हाईवे प्राधिकरण की ओर से सांबा, कठुआ, रियासी और जम्मू जिले के उपायुक्तों को जमाबंदी और अन्य राजस्व दस्तावेज सौंपने को कहा गया है। एक्सप्रेस वे के सर्वे की जद में आने वाले ढांचों और जमीन को इससे चिन्हित किया जा सकेगा। सरकारी और निजी जमीनों के अतिरिक्त जद में आने वाले ढांचों का भी आकलन होगा जिससे इनके मुआवजे को भी डीपीआर में शामिल किया जा सकेगा। आधिकारिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार अगले वर्ष तक जमीनी स्तर पर एक्सप्रेस वे का काम डीपीआर की मंजूरी और ठेकेदार को अलॉटमेंट के बाद शुरू किया जा सकेगा।
प्रदेश की हद में ड्रोन और जियोटेक्निकल सर्वे शुरू कर दिया गया है। जिससे जमीन की सतहों के साथ साथ जद में आने वाले ढांचों की भी जानकारी हासिल की जाएगी। इससे एलाइनमेंट प्रक्रिया को भी जल्द पूरा किया जा सकेगा।
-अजय कुमार रजक, परियोजना निदेशक, नेशनल हाईवे प्राधिकरण