अधिकारी के अनुसार, पुलिस विभाग में सिलेक्शन ग्रेड कांस्टेबल अब्दुल रहमान डार निवासी लारमूह (पुलवामा) और कांस्टेबल गुलाम रसूल भट निवासी लालगाम (पुलवामा) अवैध हथियारों और गोला बारूद को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का काम करते थे। पुलिस बल का सदस्य होने का अनुचित और आपराधिक लाभ उठाते हुए आतंकवादियों को छद्मवेशी वर्दी का कपड़ा और अन्य सामग्री उपलब्ध कराते थे। गुलाम रसूल भट एक जिले के शस्त्रागार में एनसीओ के रूप में लंबे समय से आतंकवादियों को गोला-बारूद और हथियारों की आपूर्ति कर रहा था। ओजीडब्ल्यू नेटवर्क के माध्यम से आतंकवादी पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ा था, जो पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों के इशारे पर काम कर रहे थे।
इसके अलावा शिक्षा विभाग में शिक्षक शब्बीर अहमद वानी निवासी बुगाम (कुलगाम) प्रतिबंधित अलगाववादी संघ जमात-ए-इस्लाम (जेईआई) का एक सक्रिय सदस्य रहा है और जेईआई को मजबूत करने व इसके समर्थकों के बीच लोगों का नेटवर्क बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। 2016 की अशांति फैलाने के लिए जिला अस्पताल पोरा में दंगा और हिंसा भड़काने वाली भीड़ की गैरकानूनी सभा को उकसाने व नेतृत्व करने में उसकी प्रत्यक्ष संलिप्तता के कारण उसके खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए हैं। अधिकारी ने बताया कि वह प्रतिबंधित आतंकी संगठनों का एक कट्टर ओजीडब्ल्यू था। विशेष रूप से कुलगाम में आतंकवादी गतिविधियों को लगातार सहायता दी और गुप्त रूप से जानकारियां एकत्र करवाईं।
आतंकवादी संगठन अल-बद्र मुजाहिदीन का मददगार था अनायतुल्ला शाह
जलशक्ति विभाग में सहायक लाइनमैन अनायतुल्ला शाह पीरजादा निवासी वतरगाम (बारामुला) प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन अल-बद्र मुजाहिदीन का मददगार था और उनके लिए काम करता था। उसका यूसुफ बलोच और तमीम जैसे खूंखार आतंकवादियों से सीधा संबंध था, जो कश्मीर में अलग-अलग समय पर सक्रिय अल-बद्र मुजाहिदीन के कमांडर थे। वह पाकिस्तान स्थित अल-बद्र मुजाहिदीन के आतंकवादियों के साथ संचार करने वाले सैटेलाइट फोन, हैंड ग्रेनेड आदि की बरामदगी से संबंधित विभिन्न एफआईआर में शामिल रहा है। गौरतलब है कि सरकारी सेवा में होने का फायदा उठाने वाले राष्ट्रविरोधी तत्वों के खिलाफ सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है।