कश्मीर घाटी में लगातार हुई बारिश और दक्षिणी कश्मीर में कई इलाकों में बादल फटने के चलते पैदा हुई बाढ़ जैसी स्थिति के कारण सोमवार को प्रशासन उन लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाने के निर्देश दिए, जो नदी नालों के नजदीक रहते हैं। वहीं मौसम विभाग ने कहा है कि 16 जुलाई तक फिलहाल बारिश के आसार नहीं हैं।
सिंचाई तथा बाढ़ नियंत्रण विभाग के अनुसार लगातार हुई बारिश के कारण झेलम नदी का जलस्तर बढ़ना शुरू हो गया था, लेकिन अगर बारिश रुकती है तो बाढ़ का खतरा टलेगा।
विभाग के अनुसार सोमवार शाम पांच बजे झेलम का जलस्तर संगम में 20.90 फीट (बाढ़ की घोषणा 21 फीट पर, खतरे का निशान 23 फीट) था, जबकि राम मुंशीबाग में 19.40 फीट (बाढ़ की घोषणा 18 फीट पर, खतरे का निशान 19 फीट) था, जो लगातार घट रहा है।
सिंचाई तथा बाढ़ नियंत्रण विभाग के चीफ इंजीनियर जावेद जाफर ने बताया कि झेलम में जलस्तर में बढ़ोतरी लिद्दर नाले में बादल फटने से बढ़े जलस्तर से हुई थी। उन्होंने बताया कि किसी भी स्थिति से निपटने के लिए विभाग तैयार है, लेकिन अब बाढ़ का खतरा टलता दिख रहा है, क्योंकि बारिश भी रुक चुकी है।
वहीं मौसम विभाग के निदेशक सोनम लोटस ने बताया कि मानसून के दौरान सटीक भविष्यवाणी करना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि 16 जुलाई तक बारिश के कोई आसार नहीं हैं। हालांकि इन दिनों बादल छाए रहेंगे।