दो से 26 सितंबर 2014 तक कश्मीर में विनाशकारी बाढ़ का दर्द झेल चुके लोगों के लिए कश्मीर में जारी माहौल और अलगाववादियों के आए दिन बंद को आगे बढ़ाने के जारी हो रहे कैलेंडर भारी पड़ रहे हैं।
इसका कारण यह है कि कश्मीर में जारी माहौल से व्यापक बाढ़ प्रबंधक कार्यक्रम को बड़ा झटका लगा है। स्थानीय श्रमिक भी काम के लिए नहीं मिल पा रहे।
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 2014 में कश्मीर में आई बाढ़ में झेलम दरिया के कहर से ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर बाढ़ में डूबा रहा। रियासत में सरकार के कामकाज का मुख्य केंद्र नागरिक सचिवालय तक बाढ़ में डूबे रहे। कई अहम फाइलें तक नष्ट हो गईं थीं। सुरक्षा बलों और भारतीय वायु सेना ने बाढ़ में फंसे करीब 80 हजार लोगों को बचाया था।