रियासत के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला
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पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के नई पीढ़ी के आतंकियों की ओर से आजादी की लड़ाई लड़े जाने संबंधी बयान पर बवाल मच गया है।
भाजपा, पैंथर्स पार्टी, हिंदू महासभा, श्रीराम सेना सहित विभिन्न संगठनों ने आपत्ति जताई है। कठुआ के बिलावर सहित अन्य स्थानों पर फारूक के खिलाफ प्रदर्शन हुए। रियासत के उप मुख्यमंत्री डा. निर्मल सिंह ने फारूक पर बरसते हुए कहा कि उनकी तीन पीढ़ियों के सत्ता सुख भोगने का नतीजा कश्मीर की जनता झेल रही है।
आने वाले दिनों में श्रीनगर तथा अनंतनाग लोकसभा उपचुनाव को देखते हुए अलगाववादियों, आतंकियों और अवाम को खुश करने के लिए वह इस प्रकार के समाज को तोड़ने वाले बयान दे रहे हैं। घाटी में हालात को बेहतर बनाने में सहयोग देने के बजाय लोगों को भड़काने की कोशिश की जा रही है।
'नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस की गलतियों की सजा भुगत रहे लोग'
फारूक अब्दुल्ला से बातचीत करते उमर
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पत्रकारों से उन्होंने कहा कि फारूक अब्दुल्ला की तीन पीढ़ियों ने 30 साल तक राज किया है। आज सत्ता से बाहर होते ही उन्हें अलगाववादियों तथा आतंकियों से हमदर्दी की याद आ गई। नेशनल कांफ्रेंस के जम्मू संभाग के नेताओं को भी फारूक के बयान पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि फारूक समय के साथ बयान बदलते रहते हैं।
जब सत्ता में थे तो कहा कि पाक पर हमला कर दो, एलओसी को ही बार्डर बना दो। दिल्ली में अलग और जम्मू तथा श्रीनगर में उनकी भाषा अलग हो जाती है। पत्थरबाजों तथा आतंकवादियों को वह समय-समय पर समर्थन देते रहे हैं। किस आजादी की बात फारूक कर रहे हैं। देश तो पहले ही आजाद हो गया है। अब कौन सी और कैसी आजादी।
जम्मू-कश्मीर के विलय को लेकर भी किसी को भ्रम नहीं होना चाहिए। जम्मू कश्मीर का विलय पूर्ण है। रियासत जिन भी गलतियों का खामियाजा भुगत रही है, वह नेकां और कांग्रेस की देन हैं। नेकां ने हमेशा से कश्मीरियों को गुमराह किया है। अब फिर से स्थिति जब सामान्य हो रही है तो नफरत की खाई बढ़ाने की कोशिशें शुरू कर दी गईं।