इंटरनेशनल बार्डर पर आतंकियों की गतिविधियां काफी बढ़ गई हैं। सीमा पर संदिग्धों की हलचल तेज होने के पीछे सबसे बड़ा कारण आतंकियों के लिए ओवर ग्राउंड वर्करों (ओजीडब्ल्यू) के नेटवर्क का मजबूत होना है। इस नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। इन वर्करों पर अब पुलिस ने भी नजर गढ़ा दी है।
खुफिया एजेंसियों ने बार्डर पर रहने वाले पूर्व पंचों, सरपंचों और अपने सोर्स के जरिये जानकारी जुटाने का काम शुरू कर दिया है। ओजी वर्कर्स के सोशल नेटवर्क पर भी नजर रखी जा रही है।
इन लोगों के संपर्क में कौन-कौन लोग हैं। ये किस तरह काम कर रहे हैं, कहां से फंडिंग हो रही है, इनके कम्युनिकेशन लिंक तलाशने के लिए विशेष दस्ते लगाए गए हैं। आईजी जम्मू एसडी सिंह का कहना है कि ओजी वर्कर्स के नेटवर्क पर पुलिस की नजर है।
वायरलेस सेट और सुरंग मिलने से खड़े हुए कई सवाल
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- फोटो : Amar Ujala
पिछले एक महीने में इंटरनेशनल बार्डर के पास आतंकी गतिविधियां बहुत बढ़ गई हैं। कठुआ में बार्डर पर विदेशी वायरलेस सेट मिला, सांबा सेक्टर में 20 मीटर लंबी सुरंग मिली। पिछले दो महीने में बार्डर पर 11 बार घुसपैठ की कोशिश की गई है।
आतंकियों की एकदम से बढ़ीं ये गतिविधियां इशारा कर रही हैं कि आतंकियों का ओजीडब्ल्यू वर्कर्स नेटवर्क मजबूत हो गया है। सूत्रों का कहना है कि जम्मू, सांबा, कठुआ और पंजाब बार्डर पर ही करीब 500 वर्कर्स सक्रिय हैं। जो आतंकियों के लिए काम कर रहे हैं।
यही नहीं, पिछले एक महीने के भीतर आरएस पुरा, कठुआ और परगवाल सेक्टर में घुसपैठ करते तीन घुसपैठिये ढेर किए जा चुके हैं। इनमें एक महिला भी शामिल है। अब महिलाएं भी घुसपैठ करने की कोशिश करने लगी हैं।