तरकीब और मेहनत की ऐसी मिसाल विरले ही देखने को मिलती है। जलवायु परिवर्तन के जिस माहौल में खेती से मुनाफा दूर की कौड़ी साबित हो रहा है, वहीं अपने जीवट और सूझबूझ से एक किसान खेती ने उद्यमशीलता की मिसाल पेश की है।
भारत-पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटे कान्हाचक गांव में रहने वाले किसान ढूंढा सिंह ने मुश्किल दौर के बावजूद खेती से मुनाफे का नुस्खा ढूंढ़ निकाला है। कभी सब्जी की पैदावार तो कभी उन्नत बीज तैयार करने के रिकॉर्ड बना चुके ढूंढ़ा सिंह को अब हल्दी की पैदावार और प्रसंस्करण की वजह से सबसे प्रगतिशील किसान की पहचान मिल गई है।
ढूंढ़ा सिंह का पूरा परिवार हल्दी की पैदावार और प्रसंस्करण के बाद हल्दी के पाउडर और अन्य मसालों की पैकेजिंग कर ग्राहकों तक पहुंचा रहे हैं। अमर उजाला से खास बातचीत में ढूंढ़ा सिंह ने किसान और खरीदारों के बीच बिचौलियों के मकड़जाल को सबसे बड़ी समस्या करार दिया।
राज्य के मुख्यमंत्री, राज्यपाल और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा नकद पुरस्कार से सम्मानित किए जा चुके ढूंढा सिंह को कई राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिल चुके हैं।
ढूंढा सिंह ने बताया कि भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद उनके कुनबे की सारी भूमि पाक अधिकृत क्षेत्र में चली गई। सरकार ने कान्हाचक में 32 कनाल भूमि अलॉट की। पारंपरिक खेती से गुजारा करना मुश्किल हो रहा था, ऐसे में उन्होंने पहले गोभी की फसल लगाई जिससे अच्छी कमाई की।