बिजली उत्पादन की बेशुमार क्षमता होने के बावजूद रियासत में मायूसी का आलम है। पनबिजली से लेकर सौर ऊर्जा की खदान कहे जाने वाले लद्दाख रीजन की नजीर और भी हैरान करने वाली है। दर्जन भर बिजली परियोजनाएं स्थापित की गई हैं। उन्हें चलाने का पूरा तंत्र भी मौजूद है, लेकिन ट्रांसमिशन लाइन न होने की वजह से अधिकांश परियोजनाएं क्षमता का एक चौथाई हिस्सा बिजली ही बना पा रही हैं।
यही नहीं महत्वाकांक्षी बिजली परियोजनाएं मंजूरी के बावजूद ठंडे बस्ते में पड़ी हैं। जम्मू-कश्मीर स्टेट पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार लद्दाख रीजन में निगम के 300 किलोवाट से लेकर 9 मेगावाट क्षमता के कुल नौ प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इनकी कुल क्षमता 19 मेगावाट के करीब है, लेकिन ट्रांसमिशन लाइन नहीं होने से प्रोजेक्ट केवल मशीनें ठीक रखने के लिए ही आंशिक रूप से चलाए जा रहे हैं।
नेशनल हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर कारपोरेशन के दो प्रोजेक्टों की कुल क्षमता 89 मेगावाट है। एनएचपीसी इन प्रोजेक्टों से क्षमता के अनुसार बिजली तैयार करने में सक्षम है, लेकिन बिजली सप्लाई करने के लिए ट्रांसमिशन लाइन का अभाव आड़े आ रहा है। इसी तरह से सौर ऊर्जा के दो अल्ट्रा मेगा प्रोजेक्ट मंजूरी के बावजूद शुरू नहीं हो पाए हैं।
जम्मू कश्मीर इनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी के सूत्रों ने बताया लेह और कारगिल में केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा कुल 7500 मेगावाट क्षमता के प्रोजेक्ट मंजूर किए गए हैं। वर्तमान में चूंकि बिजली को लद्दाख रीजन से बाहर सप्लाई करने की ट्रांसमिशन लाइन नहीं है, जिसकी वजह से प्रोजेक्ट अधर में हैं।
वहीं लेह से श्रीनगर तक 410 किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइन बिछा रही पावर ग्रिड कारपोरेशन आफ इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया लगभग दो हजार करोड़ की लागत से निर्माणाधीन ट्रांसमिशन लाइन प्रोजेक्ट वर्ष 2018 तक पूरा हो जाएगा।